समाजवादी आवासीय योजना के खिलाफ याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में खारिज

Allahabad, Uttar Pradesh, India
 समाजवादी आवासीय योजना के खिलाफ याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में खारिज

कोर्ट ने कहा जमीन अधिग्रहण कार्यवाही में कोई अनियमितता नहीं।

इलाहाबाद. सीएम अखिलेश यादव सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के लिसारी गांव की 5.3010 हेक्टेयर भूमि के समाजवादी आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण की वैधता की चुनौती याचिका खारिज कर दी है।



Samajwadi Awas
समाजवादी आवास (प्रतीकात्मक)



आवास विकास परिषद मेरठ ने भू स्वामियों की सहमति से भूमि अधिग्रहण का नीतिगत निर्णय लिया जिसके लिए मुआवजा निर्धारण कमेटी ने 5100 रूपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 27 करोड़ छह लाख 51 हजार रूपये मुआवजा तय किया है। इस आवासीय योजना में समाज के कमजोर तबके के लोगों को आवास दिये जायेंगे। कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि यदि भूमि संबंधी दस्तावेज को लेकर कोई आपसी विवाद है तो सक्षम कोर्ट में कार्यवाही कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि परिषद के अधिग्रहण कार्यवाही में अनियमितता नहीं है।



Samajwadi Awasiya Yojna
समाजवादी आवासीय योजना (फाइल फोटो)


यह आदेश न्यायमूर्ति वी.के.शुक्ला तथा न्यायमूर्ति एम.सी.त्रिपाठी की खण्डपीठ ने अजीत सिंह की याचिका पर दिया है। परिषद ने भूमि अधिग्रहण सहमति पर किया इसलिए याचिका खारिज कर कहा गया कि भूस्वामियों के बीच विवाद है ऐसे में अधिग्रहण न किया जाए। मालूम हो कि भू स्वामी गिरिराज सिंह ने 20 फरवरी 1959 को  पारिवारिक समझौता कर पूरी सम्पत्ति अपनी तीन बेटियों और एक बेटे व स्वयं के बीच विभाजित कर दिया। सभी का नाम दर्ज भी हो गया। 2012 में राज्य सरकार की तरफ से समझौता डिग्री को विखंडित करने की अर्जी दी गयी। एसडीएम ने 2012 में डिग्री समाप्त कर दी।

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