मकर संक्रांति पर संगम नगरी में उमड़ा भक्तो सैलाब लाखों श्रद्दालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी 

Allahabad, Uttar Pradesh, India
मकर संक्रांति पर संगम नगरी में उमड़ा भक्तो सैलाब लाखों श्रद्दालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी 

आस्था की भूमि प्रयाग में लगने वाले माघ मेले में उमड़ा जनसैलाब 

इलाहाबाद.  इलाहाबाद में गंगा, यमुना एवं विलुप्त हुई पौराणिक नदी सरस्वती के संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और इसी के साथ एक माह तक चलने वाले माघ मेले की भी शुरुआत हो गई है। इलाहाबाद में कड़क सर्दी के मौसम में लोग यातायात प्रतिबंधों एवं कड़े सुरक्षा प्रबंधों के कारण कई मील पैदल चलकर संगम पहुंचे। संगम में पवित्र डुबकी के बाद लोगों ने मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद लोगों ने खिचड़ी का दान किया ओर स्वयं भी खिचड़ी खाई।
 
 आस्था की भूमि प्रयाग में लगने वाले माघ मेले में मकर संक्रान्ति के स्नान के साथ माघ मास प्रारंभ हुआ। मकर संक्रांति पर प्रयाग में  संगम स्नान करने का अपना धर्मिक और पौराणिक महत्व है । धार्मिक विद्वानों की माने और मन्याता के अनुसार माघ मास में भगवान सूर्य उत्तरायण होते है और मकर राशि में प्रवेश करते है। धार्मिक मंतायाओ में कहा जाता है की आज संक्राति के दिन भगवान् भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते है । और ज्योतिष मान्यता के अनुसार भगवान शनि मकर राशि के स्वामी है । इसी के अनुसार आज के दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। इन्ही सनातन मान्यता के अनुसार संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास का अंत होता है और शुभ कार्यो की शुरुवात की जाती है।
 
माघ मास में संगम क्षेत्र में कल्पवास करने का अपना विशेष महत्व है । हिन्दू मान्यता के अनुसार जब मनुष्य जीवन के सभी कामो से मुक्त होता है ।तब संगम की रेती पर हर साल एक माह का कल्पवास करता है और बारह वर्षो बाद शैयादान के बाद अपने कर्मो का प्रायश्चित और ईश्वर की भक्ति में खुद को समर्पित करता है । संगम में स्नान और कल्पवासियो का आना पौष पूर्णिमा के स्नान सर ही प्रारंभ हो जाता है । लेकिन मकर संक्रान्ति का अपना विशेष महत्व है । दूर दराज गाँवो और दुनिया भर के लोग आज संगम के घाट पर अपनी मनोकामना और पुण्य लाभ के लिये पंहुच रहे है । गंगा किनारे स्नान का सिलसिला पुरे माह भर चलेगा ।
 
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर संगम स्नान को पुण्यकाल माना जाता है ।आज गंगा पूजन से लेकर घरो तक अनुष्ठान पुजा जप और दान कार्य प्राम्भ होता है । संक्रांति पर स्नान की पुण्य बेला 1.51 से प्रारम्भ हुई । गंगा यमुना और विलुप्त सरस्वती के संगम में स्नान करने को श्रधालुओ का ताता संगम नगरी में भोर से ही लगा है ।भक्ति के रंग में रंगा जन सैलाब अपने इष्ट की आराधना करते हुए संगम में डुबकी लगाने को बेताब । लाखो की संख्या में उमड़ा भक्तो का सैलाब अपनी धार्मिक मान्यताओ को प्रखर करता हुआ दिख रहा है ।बुजुर्गो से लेकर बच्चो महिलाओ और संतो का डेरा स्नान घाटो की और उमड़ पड़ा। और इनमे बड़ी संख्या युवा भक्तो की भी रहे दुनिया भर के लोग भक्ति के सागर में  डुबकी लगा पुण्य का लाभ नही खोना चाहता । 
 
मकर संक्रांति पर संगम स्नान के बाद दान को विशेष पुण्य लाभ के लिये तिल चावल गुड का दान किया जाता है । साथ ही गौ दान शनि को प्रसन्न करने के लिये काली तिल काली उड़द को दान में दिया जाता है । माघ मेले में आये श्रधालुओ के लिये संत समाज की और से प्रसाद वितरण किया जा रहा है ।स्नान घाट से थोड़ी दूर पर स्थित लेते हुए हनुमान जी का दर्शन कर भक्त मेले में प्रसाद ले रहे है । हर कोई अपनी श्रद्धा के अनुसार चाय बिस्किट ,ब्रेड से लेकर खिचड़ी तक का प्रसाद बाट रहा है । मान्यता है की आज के दिन दान करने से भगवान् शनि प्रसन्न होते है ।और खिचड़ी का दान करने से बधाये दूर होती है।

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