इस युवक को ऐसी बीमारी, की सर्कस वाले दो लाख में खरीदने को हैं तैयार 

Allahabad, Uttar Pradesh, India
 इस युवक को ऐसी बीमारी, की सर्कस वाले दो लाख में खरीदने को हैं तैयार 

दुखी मां- बाप नहीं बेचना चाहते हैं बेटा, हर हाल में कराना चाहते हैं इलाज 

अरुण रंजन 
इलाहाबाद. इलाहाबाद से महज 20 किमी दूर स्थित धनयिचा गांव में एक ऐसा दुर्लभ बच्चा है। जिनकी संख्या पूरे विश्व में चुनिंदा ही है। भारत में कोलकाता में अब भी दो भाई इकरमुल हक और अलीहसन नामक दो बच्चे जीवित बचे हैं। वहीं अब यूपी में ऐसे पहले बच्चे  की पहचान सामने आ रही है। हालाँकि देश में इनकी संख्या और भी हो सकती है लेकिन अभी तक इन्ही को खोजा जा सका है।

दरअसल यह बच्चा प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित है। मालूम हो कि अमिताभ बच्चन अभिनित फ़िल्म "पा" प्रोजेरिया बीमारी पर ही आधारित है। जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं। उन्हें प्रोजेरिया बीमारी रहती है।  प्रोजेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें कम उम्र में ही बच्चे में बुढ़ापे के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह वंशानुगत लक्षण है। यह लैमिन-ए-जीन में गड़बड़ी के कारण होता है। इसमें ज्यादातर बदलाव त्वचा, धमनी और मांशपेशियों पर पड़ता है। बच्चे की वृद्धि रुक जाती है, बाल झड़ जाते हैं और दांत ख़राब हो जाते हैं। त्वचा पतली हो जाती है, असमय झुर्रियां पड़ जाती हैं। शरीर में मोटे तौर पर हड्डिया और त्वचा ही बाकी रह जाती है। आँखों के आसपास गड्ढे पड़ जाते हैं। प्रोजेरिया से ग्रसित बच्चे ज्यादातर 13 साल की उम्र में ही दम तोड़ देते हैं। हालाँकि कई बच्चे 20-21 साल तक जीते हैं। ऐसे बच्चों को सोने और उठने-बैठने में दिक्क़त होती है। 


रूपेश की बीमारी से अनजान थे परिजन
बीस साल का रूपेश काफी दुबला पतला है। उसका सिर शरीर के अन्य हिस्से से काफी बड़ा है। दांत बिखर से गए है। ठीक से बोल नहीं पाती। आवाज साफ नहीं निकलती। रूपेश के पिता ने बताया कि जन्म के दो साल बाद जब मुझे लगा कि मेरे बच्चे का विकास अन्य बच्चों की तरह नहीं हो पा रहा है। मुँह छोटा होने के कारण ठीक से खाना भी नहीं जा पा रहा था। ऐसे में उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो पहले तो डॉक्टर भी बीमारी को पहचान नहीं सके। ऐसे में एक बार वो सरकारी स्वास्थ्य कैम्प में बच्चे को लेकर आये। यहां रूपेश के स्वास्थ्य कार्ड में उसकी बीमारी प्रोजेरिया लिखा गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कैम्प ख़त्म होने के साथ ही दूर्लभ बच्चे को भी भूल गया। ऐसे में प्रोजेरिया ग्रसित बच्चे रूपेश की पहचान आशुतोष मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से आयोजित कम्बर वितरण कैम्प के दौरान ट्रस्टी डॉ. गिरीश कुमार पाण्डेय ने की। गिरीश ने जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन को दी प्रशानिक अमले में हड़कंप मच गया। 

सर्कस वालों ने 2 लाख लगाई थी कीमत 
रूपेश के पिता रामपत और माँ शांति देवी अपने बच्चे को लेकर हमेशा काफी चिंतित रहती हैं। रूपेश के माँ और पिता ने बताया कि एक बार एक सर्कस वाले ने रूपेश को देख कर 2 लाख कीमत भी लगा डाली। लेकिन उन्होंने किसी भी कीमत पर उसे बेचने को तैयार नहीं हुए। उस घटना के बाद वो उसे लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। रूपेश की माँ ने बताया कि इसके सिर में हमेशा दर्द बना रहता है। जल्दी खाना नहीं खाता। दो-तीन दिन में एक बार खाता है। बच्चों के साथ खेलने में भी इसे दिक्क़त होती है। जल्दी थक जता है। 

ठेले की कमाई से गुजर बसर
रूपेश के पिता ठेला चला कर जीवन यापन करते हैं। उनके पांच बच्चे हैं। रूपेश दूसरे नम्बर का लड़का है। रूपेश के कारण कई बार काम पर भी नहीं जा पाते। ग्राम प्रधान और कोटेदार की लापरवाही के कारण आज तक राशन कार्ड भी नहीं बना। इसके कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। 

रूपेश को देख डर जाते हैं बच्चे
रूपेश के माता पिता ने बताया कि जब वो पहली बार गांव से बाहर इलाहाबाद डॉक्टर के पास ले कर गए तो वहां इसे देखने वालों की भीड़ लग गयी। कई उसकी उम्र पर विश्वास ही नहीं कर रहा था। डॉक्टर कहते ये अब बूढ़ा हो गया है। वहीं जो छोटे बच्चे थे उसे देख कर डर जाते थे। कई बार रिक्शे और ऑटो में बैठे बच्चे भी देख कर डर जाते हैं। इसे देख रूपेश भी काफी घबरा जाता है। रूपेश की माँ उसके काफी नजदीक है। माँ के रोते ही रूपेश भी रो पड़ता है।

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