अमिताभ बच्चन की फिल्म 'पा' का 'ऑरो' उन्हीं के शहर इलाहाबाद में, लाइलाज प्रजोरिया रोग से है ग्रसित

Allahabad, Uttar Pradesh, India
 अमिताभ बच्चन की फिल्म 'पा' का 'ऑरो' उन्हीं के शहर इलाहाबाद में, लाइलाज प्रजोरिया रोग से है ग्रसित

निजी संस्था उठा रही है इलाहाबाद के इस ऑरो के इलाज का खर्च।

PRASOON PANDEY

इलाहाबाद. हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की यादगार फिल्म पा का अनोखा किरदार ऑरो इलाहाबाद में मौजूद है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने तो ऑरो का किरदार निभाया था पर इलाहाबाद का ऑरो असली है और वह प्रजोरिया जैसी भयानक बीमारी से ग्रसित है जो 21 साल का होने के बावजूद बच्च दिखता है। उसकी उम्र और शरीर तो बूढ़ा होता जा रहा है पर यह दिखता बच्चे जैसा है। फिल्म में जिस किरदार को देखकर लोग बेचैन हो उठे थे वह दरअसल उस बीमारी के प्रति बेचैनी थी जो इलाहाबाद के रुपेश को है। जिस बीमारी ने दर्शकों को बेचैन कर दिया उस बीमारी के साथ रूपेश न सिर्फ जी रहा है बल्कि रफ्ता-रफ्ता उसकी उम्मीदें कुंद हो रही हैं। दिखने में सामान्य बच्चों से वह बिल्कुल अलग है। पर यह कोई कुदरती अजूबा नहीं बल्कि बीमारी का असर है। ऐसी बीमारी जिसके ग्रसित दुनियाभर में केवल 86 मरीज ही मिले हैं।




कौन है प्रजोरिया ग्रसित रूपेश
इलाहाबाद जिला मुख्यालय से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर सराय इनायत के धनैचा गांव में रुपेश नाम नाम का एक शख्स इस लाइलाज प्रजोरिया बीमारी से ग्रसित है। रुपेश के माता पिता के बताते हैं कि उसकी उम्र भले ही इक्कीस साल की है। लेकिन रूपेश बिल्कुल पा फिल्म के ऑरो जैसा दिखता है। दो बड़े दांत, छोटी आंखे और कुल 98 सेंटीमीटर का शरीर जिसका वजन महज 10 किलोग्राम। पांच भाइयों में दूसरे नम्बर का भाई है रुपेश जो देखने में बहुत उम्र का दिखता है। पिता रिक्शा चलाते है और मां घर का कामकाज देखती है। परिवार की माली हालत इतनी खराब कि दो जून की रोटी भी भगवान के भरोसे हैं। उपर से बेटे को लाइलाज बिमारी भी है। मां-बाप के सामने उसका इलाज कराना संभव नहीं। रुपेश की देख-रेख के चलते पिता भी रोज रिक्शा लेकर कमाने नहीं जा पाते। मिटटी के दो पिलर जिसपर ढेर सारी चीजें पड़ी है वही उनका घर है। रूपेश को धूप से तकलीफ होती है इसलिये उसके लेटने के हिस्से पर प्लास्टिक डाल रखी है। रुपेश अपनी मां के ही हाथों से खाना खाता है। पूछने पर बताता भी है कि मां ही ज्यादा प्यार करती है।


Progeria disease
प्रजोरिया ग्रसित रूपेश



2015 में डॉक्टरों ने दिया प्रजोरिया का सर्टिफिकेट
रुपेश के मां-बाप की मानें तो उसके इलाज के लिये वह डॉक्टर से कई बार मिले, पर किसी ने कुछ बीमारी के बारे में बताया नहीं। बचपन में रूपेश सामान्य बच्चों जैसा दिखता था पर समय के साथ उसका शरीर नहीं बढ़ा। उम्र बढ़ी और शरीर में चैकाने वाले बदलाव सामने आने लगे। सिर बेडौल हो गया मुंह में 32 की जगह 70 दांत निकल आये और शरीर छोटा होने लगा। जिले के सरकारी अस्पताल में जब रुपेश के मां-बाप ने उसकी जांच कराई तो जिले के सीएमओ ने उन्हें कागज का एक पन्ना पकड़ा दिया जिसमे लिखा था की रुपेश प्रोजेरिया बीमारी का शिकार है। डॉक्टर के मुताबिक रुपेश यूपी का ऐसा पहला बच्चा है। जो उस दुर्लभ और लाइलाज बीमारी प्रोजेरिया का शिकार है, जिसके मरीज दुनिया भर में अभी तक केवल 86 ही मिले है। रुपेश की जिन्दगी का सबसे का सबसे दुखद हकीकत यह है की उसकी सांसें कभी भी थम सकती हैं। क्योंकि इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अमूमन 12 से 15 साल से ज्यादा जी नहीं पाते। जानकारी के मुताबिक इस बिमारी से ग्रसित लोगों में रुपेश अपनी अधिकतम आयु जी रहा है। 2015 में सीएमओ की तरफ से दिया सर्टिफिकेट जिसमे यह दर्शाया गया ही की रुपेश को प्रोजेरिया है। और यह लाइलाज है इसको समझाने की जहमत डाक्टरों ने नही उठाई और रुपेश के पिता रमापति ने भी उस कागज को दवाइयों के पर्चो के साथ घर में रख दिया था । 




सर्कस वाले भी लगा गये कीमत 
बच्चा कैसा भी हो वह अपने मा-बाप के लिए सुपर स्टार होता है। पिता रमापति के अनुसार उसके बच्चे को सर्कस वाले भी लेने आये और बोले की इसे हम खरीद लेंगे उन लोगो ने रुपेश के बदले सात लाख रुपये में खरीदने के लिये कहा  तो रुपेश के माँ बाप ने उन्हें रुपेश को देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह अपने बेटे से अलग नहीं होना चाहते थे। परिवार का हाल यह है की न उनके पास रहने के लिए मुकम्मल मकान है ।और न रोजगार का कोई पुख्ता रास्ता ऐसे में वह रुपेश के लिए बेहद चिंतित है। और उनकी आखरी उम्मीद है सरकार और लोग सामने आये और उनकी मदद करें। रुपेश की मां ने कहा की आज नही तो कल हम नही रहेंगे लेकिन हमारे बच्चे के रहने के लिये सरकार एक छत दे दे।  सरकारी अमले की लापरवाही इस कदर सामने आयी की इस परिवार का आज तक राशन कार्ड नही बना है ग्राम प्रधान से कहने के बावजूद भी कोई सुनवाई नही हुई। 


फाइल वीडियो


संस्था उठा रही खर्च 
पत्रिका की टीम ने जब गांव में रुपेश से मुलाकात की तो जाना की पा जैसे दिखने वाले इस बच्चे को दुनिया के सामने कौन ले आया और किसने बताया की यूपी का पहला और देश का तीसरा प्रोजेरिया पीड़ित इस गांव में रहता है। पता चला की शहर के डॉक्टर गिरीश पाण्डेय जो आशुतोष मेमोरियल नाम की संस्था चलाते है। बीती फरवरी माह में गांव में कम्बल वितरण करने आये थे। वहां उन्होंने रुपेश को देखा और उसके परिजनों से मुलाकात की। उसके इलाज के पेपर देखकर बताया की यह एक लाइलाज बीमारी है। परिवार वालों ने बताया की उसके बाद से डॉक्टर पाण्डेय ही रुपेश की दवा कपड़े और अन्य खर्चे उठा रहे हैं। रुपेश की मां पत्रिका से बातचीत में बताया की डॉ. साहब भगवान हैं और अब मेरा बेटा ठीक हो जायेगा। मां की आवाज में जो उम्मीद थी वह उनकी आंखों में साफ दिख रही थी। रुपेश ज्यादा बोलता नहीं। उससे जब पूछा गया तो वह बोला की उसके सर में दर्द होता है। चलने पर पांव दुखते है । 



मंत्री के कहने पर भी नही पंहुचा कोई अधिकारी
रुपेश के बारे में जानकारी लेने के लिये जब डॉक्टर गिरीश पांडे को फोन किया तो वह खुद ही रुपेश के गांव आये और इस बिमारी और रुपेश से जुड़ी तमाम बातों को साझा किया डॉक्टर गिरीश पांडे ने पत्रिका को बताया कि पिछले सप्ताह जब स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह जिले के दौरे पर थे तब रुपेश और उनके माता पिता को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सिंह की मुलाकात हुई कराई। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पूरे प्रकरण को जानने के बाद यह आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मदद करेगी। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद जी जिले का स्वास्थ्य महकमा नहीं जागा और एक हफ्ते तक कोई कार्यवाही नहीं की। बीते दिनों दोबारा स्वास्थ्य मंत्री सहित मुख्यमंत्री को ट्विट कर इसकी जानकारी देने पर जिला प्रशासन हरकत में आया और सम्बन्धित अधिकारियो को आदेश दिया की रुपेश के खाद्य सामग्री दवाये और पौष्टिक चीजे उपलब्ध कराने का आदेश दिया है लेकिन परिवार वालो के अनुसार अभी तक कोई भी अधिकारी मिलने नही आया।

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