फेसबुक नहीं करता महिलाओं से भेदभाव, आरोप बेबुनियाद और निराधार

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फेसबुक नहीं करता महिलाओं से भेदभाव, आरोप बेबुनियाद और निराधार

 फेसबुक ने कंपनी के अंदर काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ भेदभाव के आरोप से इनकार किया है। कंपनी ने कहा कि किसी के साथ भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता। ये आरोप पूरी तरह से आधारहीन और बेबुनियाद है।

सैन फ्रांसिस्को: दुनिया की अग्रणी सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक ने कंपनी के अंदर काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ भेदभाव के आरोप से इनकार किया है। हाल ही में फेसबुक पर आरोप लगे थे कि कंपनी में काम करने वाली महिला प्रोग्रामरों द्वारा तैयार कोड अक्सर खारिज कर दिए जाते हैं।


विश्लेषण अधूरा और गलत-फेसबुक
समाचार-पत्र 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक में काम करने वाले एक इंजीयिर द्वारा किए गए विश्लेषण में पता चला है कि फेसबुक के इंजिनीयरिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाली  फीमेल द्वारा तैयार किए गए कोड मेल सहकर्मियों की अपेक्षा कहीं अधिक बार खारिज कर दिए जाते हैं।

जर्नल की रिपोर्ट अधूरा और अशुद्ध
प्रौद्योगिकी वेबसाइट 'टेक क्रंच' ने फेसबुक के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा है, जैसा कि हम पहले कह चुके हैं, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट एक अधूरे और अशुद्ध विश्लेषण पर आधारित है। जिसे फेसबुक के एक पूर्व इंजिनीयर ने अधूरे आंकड़ों के आधार पर तैयार किया है।"

मेल के मुकाबले फिमेल एम्प्लॉय के केड होते खारिज
वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित विश्लेषण के मुताबिक, फेसबुक में महिला इंजीनियरों के काम अपने पुरुष सहकर्मियों की अपेक्षा 35 फीसदी अधिक खारिज होते हैं।

फिमेल एम्प्लॉय से पूछे जाते हैं कई सवाल
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को अपने कोड पर मंजूरी हासिल करने में कहीं अधिक इंतजार करना होता है और उनसे कहीं अधिक सवाल पूछे जाते हैं और कहीं अधिक टिप्पणियां की जाती हैं।

महिला पुरुष के आधार पर कोड नहीं होता खारिज
वहीं फेसबुक के हेड ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर जे. पारिख के मुताबिक, किसी इंजीनियर का काम खारिज होने में दिख रहा अंतर उसके महिला या पुरुष होने के आधार पर नहीं है, बल्कि उसकी वरीयता के आधार पर है। उल्लेखनीय है कि फेसबुक के टेक्निकल डिपार्टमेंट में कुल 17 फीसदी महिलाएं काम करती हैं, लेकिन उच्च पदों पर नहीं हैं, जो समस्या की ओर इशारा करता है।

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