बड़ा खुलासा: आडवाणी, जोशी ने नहीं भाजपा के इस पूर्व सासंद ने गिरवाई थी मस्जिद!

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 बड़ा खुलासा: आडवाणी, जोशी ने नहीं भाजपा के इस पूर्व सासंद ने गिरवाई थी मस्जिद!

 आडवाणी, जोशी ने नहीं भाजपा के इस पूर्व सासंद ने गिरवाई थी मस्जिद!

अयोध्या. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाये जाने का आदेश देने के बाद बीजेपी के लिए पार्टी के पूर्व सांसद व रामजन्म भूमि न्यास के सदस्य राम विलास वेदांती ने नई मुश्किलें खडी कर दी हैं।

वेदांती ने दावा किया कि अयोध्या में बाबरी ढांचा उनके कहने पर तोड़ा गया। वेदांती की मानें तो उन्होंने ही कार सेवकों को ढांचा तोड़ने के आदेश दिये थे। उनके मुताबिक वीएचपी के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के अलावा महंत अवैधनाथ भी इस साजिश में शामिल थे। वेदांती का कहना है कि भले ही उन्हें फांसी हो जाए लेकिन वो अपने बयान से नहीं पलटेंगे। 


बताते चलें कि बुधवार को सु्प्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पीसी घोष और न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन की संयुक्त पीठ ने मामले में सीबीआई की अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि बाबरी विध्‍वंस मामले में आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 12 नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्पेशल कोर्ट 2 साल में मामले की सुनवाई पूरी करे। वहीं केस को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया है जहां तक सुनवाई रायबरेली में हो गई थी, उससे आगे की सुनवाई वहां होगी साथ ही मामले से जुड़े जजों के तबादले पर रोक लगा दी गई है। हालांकि कोर्ट ने मामले में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह राहत दी है।

ये था मामला

बाबरी मस्जिद विध्वंस का मामला दरअसल 6 दिसंबर 1992 का है। जब हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को ढहा दिया. इसके बाद बाद देश भर में सांप्रदायिक दंगे हुए। सीबीआई ने कोर्ट से बीजेपी के वरिष्ठे नेता लालकृष्ण आडवाणी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती सहित 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलने की मांग की थी। सीबीआई की ओर से पेश वकील नीरज किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि रायबरेली की कोर्ट में चल रहे मामले को भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर ज्वाइंट ट्रायल चलाया जाए।

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