फिर सपा से ज्यादा भाजपा में देखने को मिलेगी बगावत

Azamgarh, Uttar Pradesh, India
फिर सपा से ज्यादा भाजपा में देखने को मिलेगी बगावत

बाहरियों के आने से परेशान है भाजपाई

आजमगढ़. सपा की बगावत जगजाहिर हो चुकी है। लेकिन भाजपा में भी कम शोले नहीं भड़क रहे हैं। बस देरी है तो टिकट के घोषणा की। पिछले चुनाव की तरह अगर बाहरियों को तरजीह दी गयी तो यहां सपा से भी अधिक बगावत देखने को मिल सकती है। कारण कि हर सीट पर माहौल देख पुराने भाजपाई मैदान में उतरने के लिए कमर कस कर तैयार हैं। लेकिन उन्हें दूसरे दलों से आये टिकट के दावेदार अपनी राह में कांटे दिख रहे हैं।


बता दें कि पूर्वांचल में सर्वाधिक दस विधानसभा सीट आजमगढ़ में है। वर्तमान में नौ पर सपा और एक पर बसपा का कब्जा है। जिले में भाजपा का प्रदर्शन कभी भी अच्छा नहीं रहा है। 1991 की राम लहर में पार्टी सरायमीर व मेहनगर सीट जीतने में सफल रही थी। 

इसके बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में लालगंज सीट से नरेंद्र सिंह विजयी हुए थे। इसके बाद विधानसभा में फिर कभी भाजपा का खाता नहीं खुला। 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित सफलता व सपा में मचे घमासान के बीच भाजपाइयों को यह लगता है कि वे 2017 में सरकार बना सकते हैं। इससे पार्टी नेताओं की महत्वाकांक्षा भी बढ़ी है।

अतरौलिया सीट से माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव के पुत्र डा.संग्राम यादव के खिलाफ कलराज के करीबी रमाकांत मिश्र, राजनाथ के करीबी जयनाथ सिंह व विपुल सिंह टिकट के लिए लाइन में लगे हुए हैं। इसके अलावा कई और नेता हैं जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। जाति समीकरण को देखते हुए यह सीट भाजपा गठबंधन में भासपा को भी दे सकती है ताकि किसी निषाद, राजभर या कुर्मी को लड़ा कर सीट हासिल किया जा सके। सदर सीट से अखिलेश मिश्रा गुड्डू सहित दर्जन भर दावेदार हैं। 

लेकिन यहां दुर्गा को चित करने के लिए भाजपा रमाकांत पर दाव खेलने की तैयारी कर रही है। सगड़ी में घनश्याम पटेल, दिवाकर सिंह टिकट के प्रबल दावेदार हैं लेकिन कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए अरविंद जायसवाल भी दावेदारी ठोंक रहे हैं। इसी तरह मुबारकपुर में दुर्गविजय यादव, ध्रुवसिंह, लक्ष्मण मौर्या, हरेंद्र सिंह आदि टिकट के लिए लाइन में लगे हैं।

जबकि चर्चा इस बात की है कि भाजपा सीट हासिल करने के लिए बसपा से आये दारा सिंह चौहान को मैदान में उतार सकती है। निजामाबाद में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सहजानन्द राय, क्षेत्रीय मंत्री विनोद राय प्रबल दावेदार हैं लेकिन हाल में भाजपा में शामिल हुए डा.पीयूष यादव का पोस्टर बैनर क्षेत्र में सबसे ज्यादा नजर आ रहा है। 

फूलपुर व दीदारगंज में इसी तरह आधा-आधा दर्जन दावेदार हैं। अहम बात है कि दोनों सीट पर रमाकांत यादव का भी दावा है। फूलपुर से बेटे व दीदारगंज से बहू को लड़ाना चाहते हैं। जबकि बसपा छोड़ कर भाजपा में आये पूर्व राज्य मंत्री कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा भी दीदारगंज से टिकट के लिए लाइन में लगे हैं। सब मिलाकर आधा दर्जन सीटों पर बाहरियों की नजर है। इसमें कई ऐसे प्रत्याशी हैं जो आसानी से टिकट हासिल कर सकते हैं। यदि बाहरियों को टिकट मिला तो पार्टी में बगावत तय है और भाजपा में बगावत हुई तो इनका हस्र सपा से भी बुरा होगा।

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