मुलायम परिवार के झगड़े से सपाई ही नहीं कांग्रेसी भी है संशय में

Azamgarh, Uttar Pradesh, India
मुलायम परिवार के झगड़े से सपाई ही नहीं कांग्रेसी भी है संशय में

अखिलेश के नेतृत्व में कांग्रेसियों को ज्यादा भरोसा

आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में अखिलेश की अगुवाई में साइकिल सरपट दौड़ी थी। उस समय पार्टी ने यूपी में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाया था,  केवल आजमगढ़ में दस मे से नौ सीट सपा को मिली थी। एक बार फिर चुनाव सिर पर है और पार्टी बाप बेटे के झगड़े में उलझी दिख रही है। झगड़ा नहीं सुलझा तो चुनाव चिन्‍ह फ्रीज भी हो सकता है बल्कि यू कहें कि साइकिल पंचर हो सकती है। इससे सपाई असमंजस है और दूसरे दल पूरे घटनाक्रम पर नजर जमाये हुए हैं। खासतौर पर कांग्रेस जो अखिलेश के भरोसे सत्‍ता सुख भुगतना चाहती है। वहीं इस बीच पार्टी के सीनियर नेता ने कहा कि नये सिंबल मिलने की स्थिति में लोगों तक उसे पहुंचाना लगभग नामुमकिन है। 

जल्द ही यह फैसला आने की संभावना है कि साइकिल किसकी होगी अखिलेश या मुलायम। वैसे आयोग सिंबल फ्रीज भी कर सकता है। अखिलेश घड़े के साथ ही कांग्रेसी भी यही चाहते हैं कि साइकिल अखिलेश को मिले। खासतौर पर मुलायम के गढ़ के सपाई और कांग्रेसी। क्‍यों कि दोनों को ही अखिलेश में अपना भविष्‍य दिख रहा है। रहा सवाल मुलायम गुट का तो इसमें गिनेचुने नेता ही बचे हैं। यही वजह है कि इनकी दावेदारी भी कमजोर मानी जा रही है।

समाजवादी पार्टी सूत्रों की माने तो शुक्रवार को चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी हो चुकी है। फैसला सुरक्षित रखा गया है। विधायक, एमपी और एमएलसी भले ही अखिलेश के साथ अधिक हो लेकिन मुलायम गुट का चुनाव चिन्‍ह पर दावा मजबूत माना जा रहा है। कारण कि जिस अधिवेशन में अखिलेश को अध्‍यक्ष बनाया गया उसे गलत साबित करने के लिए मुलायम गुट ने पर्याप्‍त सुबूत पेश किये हैं।

 
अब फैसला जो भी हो लेकिन इसका असर चुनाव पर पड़ना तय माना जा रहा है। एक वरिष्‍ठ सपा नेता की माने तो दोनों गुट लाख दावे कर रहे हो लेकिन सिंबल फ्रीज होने की स्थित में नये सिंबल के साथ किसी के लिए मैदान में उतरना आसान नहीं होगा और इतने अल्‍प समय में जनता तक उसे पहुंचाना तो नामुमकिन है।


भाजपा और बसपा पूरे घटनाक्रम पर नजर इसलिए लगाये है कि उन्‍हें सिंबल फ्रीज होने में अपना फायदा दिख रहा है। वैसे इन सब के बीच भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव कहते है कि बहुत जल्‍द खबर आने वाली है कि पिता पुत्र एक हो गये है। यह शिवपाल को अलग थलग करने के लिए मुलायम की साजिश है।

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