मुख्तार नहीं ओवैसी का चल सकता है जादू, नए समीकरण ने उड़ाई सपा की नींद  

Azamgarh, Uttar Pradesh, India
मुख्तार नहीं ओवैसी का चल सकता है जादू, नए समीकरण ने उड़ाई सपा की नींद  

तेजी से बढ़ रहा है ओवैसी की तरफ बढ़ रहा है मुस्लिम युवाओं का रूझान...दूसरी तरफ  AIMIM ने ...

आजमगढ़. यूपी की सत्‍ता पर काबिज कौन होगा इसका फैसला इस बार पूर्वांचल करेगा। पिछले दो दशक में सत्‍ता पर वहीं दल काबिज हुआ है जिसको यहां ज्‍यादा सीटें मिली हैं लेकिन इस बार उलेमा कौंसिल द्वारा बड़ा गठबंधन करने और एआईएमआईएम के मैदान में आने से परिस्थितियां बदली हुई हैं। 


एकबार लगा था कि मुख्‍तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का विलय कराकर सपा फायदे में रहेगी लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। कारण कि युवा वर्ग को ओवैसी की पार्टी अपनी तरफ तेजी से आकर्षित कर रही है।

बता दें कि पूर्वांचल में विधानसभा की सवा सौ सीटें हैं। वर्ष 2007 में बसपा और 2012 में पूर्वांचल फतह सपा पूर्ण बहुमत से सत्‍ता में आयी। इसके पूर्व वर्ष 1991 की की राम लहर में यहां के लोगों ने भाजपा को सिर आंखों पर बिठाया था तो पार्टी पूर्ण बहुमत से सत्‍ता में आने में सफल रही थी।

वर्ष 2017 के चुनाव में पूर्वांचल को भाजपा की कमजोर कड़ी के रूप में देखा जा रहा था। खासतौर पर आजमगढ, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, अंबेडकरनगर जो सपा और बसपा का गढ़ माना जाता रहा है। मऊ और गाजीपुर के सबसे प्रभावशाली नेता मुख्‍तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल को सपा में शामिल कर सपा ने अपनी स्थित और मजबूत कर ली थी लेकिन वर्तमान में यहां का सियासी माहौल बदला बदला दिख रहा है।

विलय के बाद से जहां सपा के कुछ दावेदार अपनों के फैसले से नाराज दिख रहे हैं तो कौएद के लोगों को यह फैसला हजम नहीं हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ इनसे नाराज मुस्लिम युवा का रूझान तेजी से ओवैसी की तरफ बढ रहा है। खास तौर पर आजमगढ और आसपास के जिलों में यह पार्टी मजबूत होती दिख रही है। उलेमा कौंसिल गठबंधन भी चुनाव के लिए कमर कसकर तैयार है। इससे सपा और बसपा की मुसीबत बढ़ती दिख रही है।

कारण कि इनकी सफलता कहीं न कहीं अल्‍पसंख्‍यक मतों पर ही निर्भर करती है। यह के अल्‍पसंख्‍यक जब जिसके साथ खड़े हुए है उसकी स्थित मजबूत रही है। मुस्लिम मतों को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों ही दल पूरी ताकत लगा रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ ओवैसी की पार्टी अल्‍पसंख्‍यकों को यह बताने में जुटी है कि दोनों ही दल भाजपा का डर दिखाकर अल्‍पसंख्‍यकों की भावनाओं से खलती रही है। कम से कम वह यूवाओं को यह समझाने में सफल दिख रही है।

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