आठ साल पहले बना अस्पताल अभी तक नहीं हुई चिकित्सकों की नियुक्ति 

Azamgarh, Uttar Pradesh, India
आठ साल पहले बना अस्पताल अभी तक नहीं हुई चिकित्सकों की नियुक्ति 

आठ वर्षों से लटका रहा ताला, अब आयुर्वेदिक अस्पताल को किया गया शिफ्ट

आजमगढ़. प्रदेश की सपा सरकार गरीब ग्रामीणों के लिए तरह-तरह की योजनाएं संचालित करा कर लाभान्वित करने का कार्य सचमुच सराहनीय है। लेकिन मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी फेरने का कार्य जनपद का जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है। 

इसका जीता जागता उदाहरण है सठियांव ब्लाक अंतर्गत ग्राम नैठी में बना अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र। उक्त केंद्र बनने के कई वर्षों बाद तक ताला लटका रहा परंतु कुछ माह पहले देख-रेख के लिए राजकीय आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र शिफ्ट कर दिया गया। जबकि इस केंद्र को चालू करने के लिए ग्रामीणों द्वारा स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य अधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से शिकायत की गयी लेकिन लापरवाह स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण यहां के ग्रामीणों को उपचार के लिए जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुबारकपुर जाना पड़ता है जो स्वास्थ्य विभाग के लिए शर्मनाक बात है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र शासन द्वारा 8 वर्ष पहले बनकर तैयार हुआ था। लेकिन इस स्वास्थ्य केंद्र की शुरूआत आज तक नहीं हो पायी जिससे ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आखिर शासन लाखों रुपये खर्च कर जनहित में सुविधाएं उपलब्ध कराकर ग्रामीणों की परेशानियों को कम करने का प्रयास कर रही है। 

लेकिन सरकर की यह सुविधा आम जनमानस को नहीं मिलेगी तो स्वाभाविक है कि आम जनता इसका दोषी प्रदेश की सरकार को ही मानेगी जो काफी हद तक सही भी है जिसका कारण स्वास्थ्य विभाग है।

स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण आज तक इस परेशानियों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। इन समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने एक वर्ष पूर्व गांव में चौपाल लगाने आये मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत किया लेकिन उसके बाद भी गहरी निद्रा में सोये लापरवाह जिला प्रशासन तिा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अभी तक नहीं जाग पाये। उक्त स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण दागदार बन रहा है।

इस संबंध में पूछे जाने पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने दूरभाष पर बात करना उचित नहीं समझा। वर्तमान में जिला मुख्यालय से कई चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है परंतु चिकित्सक यहां आना ही नहीं चाहते तो स्वाभाविक है कि अस्पताल बंद ही रहेगा। ग्रामीणों को उपचार हेतु झोला छाप डाक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की नियुक्ति करा कर आम जनमानस को राहत पहुंचाये जाने की मांग की है।

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