खुले में शौचमुक्त से पिछड़ा बड़वानी 

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खुले में शौचमुक्त से पिछड़ा बड़वानी 

सोच नहीं बदली, बड़वानी में एक और जिले के 17 गांव ही ओडीएफखुले में शौच मुक्त जिला बनने में पिछड़ा जिलासवा लाख में से 9603 शौचालय ही बन सके समीक्षा पत्रक में भी यही दिखे हालात, लक्ष्य पाना मुश्किल



बड़वानी. खुले से शौच मुक्त जिला बनने में बड़वानी बहुत ज्यादा पिछड़ गया है। जिले की 418 पंचायतों में से मात्र 17 पंचायतें ही ओडीएफ (खुले से शौच मुक्त) हो पाई है।  ये हम नहीं कह रहे, जिला पंचायत में 17 अप्रैल को ओडीएफ की समीक्षा में दिए गए प्रगति पत्रक कह रहे हैं। हालात ये है कि बड़वानी जनपद की 52 पंचायतों में से मात्र एक ही ग्राम पंचायत धमनई ओडीएफ हुई है। जिले की स्थिति देखे तो स्थिति और भी बुरी नजर आ रही है। आठ में से चार जनपद में तो एक भी पंचायत ओडीएफ नहीं दर्शाई गई। क्योंकि सोच नहीं बदली इस कारण बड़वानी जिला नहीं बना खुले में शौच मुक्त।









जिले को ओडीएफ बनाने के लिए शासन ने अभियान तो जोर-शोर से आरंभ किया था, लेकिन प्रगति सूचक में दर्शाते आंकड़ों ने अभियान की हवा निकाल दी है। जिले में करीब सवा लाख शौचालय बनाए जाने थे। अब स्थिति ये है कि मात्र 9603 शौचालय ही बनाए हुए बताए जा रहे हैं।

एक लाख से ज्यादा शौचालय बनाना शेष है। आठ जनपदों में किसी के पास एक माह तो किसी के पास दो माह और किसी के पास तीन माह का समय शेष है।  बने हुए और शेष शौचालयों के आंकड़ों में भारी अंतर नजर आ रहा है। जब समयावधि में ही नाममात्र के शौचालय बने है तो फिर शेष समय में कैसे बड़ी मात्रा में शौचालयों का निर्माण पूरा हो सकेगा।









सात पंचायतों में एक भी शौचालय नहीं
बड़वानी जनपद में तो ये हाल है कि सात पंचायतों में एक भी शौचालय नहीं बनाना प्रगति पत्रक में दर्शाया गया है। इसमें धनोरा में 88 शौचालय, पिपलाज में 139, बोरी में 185, भूराकुआं में 208, चारखेड़ा में 354, लोनसरा खुर्द में 165 और कसरावद में 408 शौचालय बनाए जाने है। इन सातों पंचायतों में शौचालय बनने का काम शुरू ही नहीं हुआ है। ऐसी ही स्थिति अन्य सातों जनपदों की भी है, जहां कई ग्राम पंचायतों में भी बड़वानी जनपद जैसे ही हाल है।







चार जनपद में तो एक भी ओडीएफ नहीं
जिले की चार जनपदों में तो एक भी ग्राम पंचायत ओडीएफ नहीं बन पाई है। इसमें सेंधवा, वरला, राजपुर और पाटी जनपद शामिल है। इसमें से राजपुर और पाटी को 30 जून तक लक्ष्य पूरा करना है। वहीं, सेंधवा और वरला को अपना लक्ष्य 30 सितंबर तक पूरा करना है। चारों जनपदों में देखा जाए तो औसतन एक जनपद में 15 हजार शौचालय बनना शेष है। सरपंच, सचिवों की लंबी चलती दिख रही हड़ताल से ये लक्ष्य असंभव ही नजर आ रहा है।

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