90 वर्षो से मौन व्रत पर 105 वर्ष के मौनी महाराज 

Mukesh Yadav

Publish: Feb, 17 2017 07:14:00 (IST)

Balaghat, Madhya Pradesh, India
 90 वर्षो से मौन व्रत पर 105 वर्ष के मौनी महाराज 

21 मन सामग्रियों के महामृत्युजय और लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के साथ तोड़ेंगे मौन व्रत,शहर के शंकरघाट शिवि मंदिर प्रागंण में होगा आयोजन,जिलेभर के धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी कर रहे तैयारियां

बालाघाट. देश के प्रयाग ग्राम बारी डालटनगंज बिहार के संत 108 मौनी महाराज का बालाघाट आगमन हुआ है। 105 वर्षो की लंबी आयु पूर्ण कर चुके मौनी महाराज अपने जीवन के अंतिम दिनों में बालाघाट की पावन धरा पधारे हैं। जिनके द्वारा करीब 90 वर्षो से मानव कल्याण के हितार्थ मौन व्रत धारण किया हुआ है और महाराज जी ने बालाघाट में ही इस मौन व्रत को तोडऩे की इच्छा जाहिर की है। जिसको लेकर वृहद स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी गई है।
कार्यक्रमानुसार शहर के वैनगंगा नदी पर स्थित शंकरघाट शिव मंदिर प्रांगण में एक वृहद स्तर का यज्ञ परिसर का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें जिलेभर के समस्त धार्मिक संगठनों की मदद से 21 मन (840 किग्रा.) हवन सामग्रियों से महामृत्युंजय और श्रीश्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का वृहद अनुष्ठान किया जाएगा। यह अनुष्ठान 24 फरवरी से शुरू होकर 04 मार्च तक सतत चलेगा। इसके बाद 04 मार्च के दिन ही 108 मौनी महाराज अपना मौन व्रत तोड़ेगें। इसके बाद अन्य धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
मानव कल्याण के लिए रखा व्रत
श्रीश्री 108 मौनी महाराज मौन व्रत धारण किए होने के कारण लिखकर अपनी बातें सांझा करते हैं। उन्होंने शुक्रवार को पत्रिका से विशेष मुलाकात के दौरान अपने विचार लिखकर सांझा किए। उन्होंने बताया कि ब्राम्हण समाज में उनका जन्म हुआ था। इसके बाद माता पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद करीब 13-14 वर्ष की आयु में उन्होंने श्रीश्री 108 श्री जागेश्वर महाराज जी को अपना गुरू माना और उनके शरण में चले गए। इसके बाद भगवान भोलेनाथ की इच्छा संकेतों पर उन्होंने मौन व्रत धारण किया, जिसका पालन वे करते आ रहे हैं। अब वैनगंगा की पावन धरा पर वे अपना व्रत तोड़ेंगे। इन्होंने बताया कि मौैन व्रत के दौरान वे देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों, तीर्थ स्थानों पर्वत पहाड़ों में रहकर तपस्या कर चुके हैं। 

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned