बेटियों के कदम पड़ते ही दफ्तारों में छा गई रौनक

Balaghat, Madhya Pradesh, India
    बेटियों के कदम पड़ते ही दफ्तारों में छा गई रौनक

पत्रिका के बेटिया @वर्क के तहत बेटियों ने जानी पैरेंट्स की दुनिया

बालाघाट. सोमवार का दिन खास रहा। जब बेटियों ने बिटिया ञ्च वर्क के तहत अपने माता-पिता के कार्यस्थल पहुंचकर न केवल उनके कार्यो को जाना बल्कि कार्य के दौरान होने वाली परेशानी, संघर्ष का अहसास भी किया। अभिभावकों के क्रिया कलाप को देख, समझ बिटिया ने उनके परिश्रम को महसूस भी किया। इस दौरान अभिभावकों ने अपनी बिटिया को भावनात्मक रूप से कार्यो की जानकारी भी दी। जब बिटिया दफ्तर या शॉप पहुंची तो अभिभावकों के चेहरे खिल उठे। इतना ही नहीं बिटिया को कार्य सौंपकर एक पल के लिए वे आजाद हो गए। यह सब कुछ संभव हुआ है पत्रिका के बिटिया ञ्च वर्क पहल के तहत। दरअसल पत्रिका सहूह ने 20 मार्च को अनूठा अभियान बिटिया ञ्च वर्क आयोजित किया। जिसमें नौकरी पेशा, अधिकारी, कर्मचारी, व्यवसायी अपनी बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक भाव जागृत करने की पत्रिका की इस पहल को सराहा भी। 
बिटियां का नाम- सौम्या भूरिया। 
पिता का नाम - आकाश भूरिया (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक)
विडियों देखने के लिए यहां क्लिक करें। 

iframe width="560" height="315" src="https://www.youtube.com/embed/iDLcWgzNDnU" frameborder="0" allowfullscreen>

विभाग- पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालाघाट।

पापा का कार्य साहसिक व रोचक, लेकिन मै बनुंगी डॉक्टर
:- पापा के साथ उनके दफ्तर आना अच्छा अनुभव रहा। पापा की चेयर पर बैठकर उनका काम सीखना मेरे लिए किसी सपने जैसा सुखद अनुभव रहा। मैने पापा की तरह ही लोग कैसे शिकायत लेकर आते हैं, उन्हें कैसे न्याय दिलाया जाता है इसका प्रेक्टिकली अनुभव किया, जो बहुत अच्छा लगा। आज मै पहली बार पापा के दफ्तर पहुंची हॅू, पापा का कार्य साहसिक व काफी रोचक लगा ेलेकिन मै अपने पापा के सपने को अपना सपना बनाकर उसे पुरा करुंगा और आगे डॉक्टर (हार्ट सर्जन) बनाना चाहूंगा। पत्रिका की सोच बताती है बेटिया उनके लिए कितनी अहम है।- सौम्या।

Image may contain: one or more people and people sitting
बिटिया का नाम महक चावला
पिता का नाम राम चांवला (परियोजना प्रशासनक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयबालाघाट)

पापा का काम समझा
:- मैने पापा की कुर्सी पर बैठकर उनका काम  समझा। पापा मुझे खड़े रहकर अपना काम समझा रहे थे। यह पल यादगार रहा। पापा कितना जिम्मेदारी भरा वर्क करते हैं, अकेले इतने स्कूल व कार्य को कैसे संभालते हैं। आज पापा के साथ गुजारे पल और मीठे अनुभव को मै कभी जिंदगी में नहीं भूल पाउंगी। जब भी इस पल को याद करेंगे तो पत्रिका अभियान की तारीफ भी होगी। अगले वर्ष पहले से ही 20 अप्रैल की तैयारी कर लूंगी।-  महक

Image may contain: 2 people, people sitting
बिटिया का नाम- आयुषी हजारी 
माता का नाम- नीलम हजारी ( सांस्कृतिक टीचर एमएलबी स्कूल बालाघाट)

बहुत मजा आया और अच्छा भी लगा
:- बेटिया ञ्च वर्क अभियान ने मुझे मेरी मम्मी का काम समझने का मौका दिया। स्कूल बहुत बार आई, लेकिन मम्मी के साथ बैठकर उनके कार्यो को फालो करना और समझने में जो मजा आया सच में मैं कभी नहीं भूल सकती।- आयुषी हजारी। 

Image may contain: 1 person, sitting
बिटिया का नाम मन्नत कुसरे। 
माता का नाम ममता कुसरे। (पीआरओ नगरपालिका परिषद बालाघाट)

बारीकी से जाना समाचार लेखन कार्य
:- ममा अक्सर घर में मुझे अपने वर्क से संबंधित चर्चाएं करती थी, तो मुझे बड़ी उत्सुकता थी कि मै भी ममा के साथ उनके दफ्तर जाऊं और वे कैसे घर व आफिस दोनों संभालती है देख सकूं। आज चाहे कोई कारण हो उन्होंने मुझे अपने साथ लेकर आई और बारीकी से समाचार लेखन व भेजना सीखा काफी अच्छा लगा। मुझे अपनी ममा पर गर्व है।- मन्नत कुसरे। 

Image may contain: one or more people
दुकान का नाम- वर्मा स्टेशनरी व डेली नीड्स रामगली।
बिटिया का नाम- शैली व शिरी वर्मा।
माता - ज्योति शरद वर्मा। 
मम्मी के संघर्ष को जाना 
मम्मी को रोज सामानों की बिक्री करने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है, इसकी जानकारी आज मम्मी ने हमें बताया। इसके पहले हम काम को आसान समझते थे। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। आज हमें एहसास हुआ कि काम कैसे किया जाता है। वहीं फोटो कापी मशीन का संचालन करना बहुत अच्छा अनुभव रहा।
- शैली व शिरी 

Image may contain: one or more people and people standing
प्रतिष्ठान का नाम- ओम प्रिंटर मोतीनगर।
बिटिया का नाम- योशिका पिपलेवार।
विडियों देखने के लिए यहां क्लिक करें।
 
पिता       - चंद्रकांत पिपलेवार।
पापा का काम बहुत कठिन 
पापा का काम बहुत कठिन है। मै अभी छोटी हूं, लेकिन पापा के काम को समझने का मौका मिला है। मै पहले भी दुकान में आई थी, लेकिन मैने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। आज पत्रिका के अभियान के कारण यह संभव हुआ। अब मै जरूर पापा की हैल्प किया करुंगी।
-योशिका

Image may contain: one or more people
दुकान का नाम- पानी पुरी सेंटर रामगली।
विडियों देखने के लिए यहां क्लिक करें।-
बिटिया का नाम- निधी सेन।
मामा       - कविता सेन।
पापा से सीखी चाय बनानी
आज पहली बार पता चला कि ममा को कैसे पता चल जाता है कि लोगों को कैसा स्वाद पसंद है, तभी तो वे घर में भी बहुत स्वादिष्ट भोजन बनाती है। आज पत्रिका अभियान के कारण मुझे ममा कैसे पानी पुरी तैयार करती है और लोगों को सर्व करती करीब से जानने का मौका मिला। सच में यह बहुत कठिन कार्य हैं। आज से मैं नित्य ममा की हेल्प करने का प्रयास करुंगी।- निधी सेन।

Image may contain: 1 person, standing
दुकान का नाम- किराना दुकान।
बिटिया का नाम- क्रुष उर्फ झिलमिल रंगारे।
पिता       - रेखलाल रंगारे। 
वजन करना बताया 
आज पापा ने मुझे सभी सामानों का मूल्य बताकर उनका वजन कैसे करना है और वजन के हिसाब से कैसे उसका मूल्य निकालकर रुपए लेने है बताया। पापा इतनी सारी सामग्रियों के मूल्य मौखिक कैसे याद रखते है काफी आश्चर्य जनक लगा। अब से मै भी रोज पढ़ाई के अलावा पापा का कार्य सीखने दुकान आया करुंगी।
 -झिलमिल रंगारे।

Image may contain: 1 person, standing
दुकान का नाम- मॉ पान चाय सेंटर।
बिटिया का नाम- दामिनी लिल्हारे।
पिता       - उमेश लिल्हारे। 

आज पापा ने बनाई चाय
घर में तो रोज मम्मी ही चाय बनाती है, आज पापा के हाथों से बनी चाय का स्वाद लिया सच मुझ पापा तो मम्मी से अच्छी चाय बनाते हैं। मैने आज पापा से चाय बनाना भी सीखा है, हम में चाहे जैसी चाय बनती हो लेकिन पापा दुकान में स्वादिष्ट चाय बनाने का प्रयास करते हैं। मै चाहूंगी की खूब पढ़ाई करुं व अफसर बनू, ताकि पापा मम्मी को कभी ऐसे चाय बनाना न पड़े। 
- दामिनी लिल्हारे।

Image may contain: one or more people, people sitting, camera and indoor
दुकान का नाम- साक्षी सिलाई सेंटर व ब्यूटी पार्लर केन्द्र गायखुरी।
बिटिया का नाम- खुशी दौने।
माता       - सरिता दौने।
दूसरों को संवारकर खुश होती है ममा

ममा कई कई घंटे मशीन कैसे चलाती है पैरो के साथ ही ऑखों में प्राब्लम आती है, हॉ लेकिन मैने आज ममा के साथ दुकाने में दूसरों को सजाने संवारने का आनंद लिया। ममा का काम कितना रोचक है जो दूसरों को सजाती है व कपड़ों में फिटिंग देती है और स्वयं खुश होती है। सज में मै ममा से जरूर कार्य सीखूंगी और भविष्य में ऐसे ही सर्वगुण संपन्न बहु कहलाउंगी।- खुशी

Image may contain: 1 person, sitting
विभाग का  नाम- पोस्ट आफिस। 
बिटिया का नाम- नेहा मेहरबान।
पिता       - शरद मेहरबान।

पापा के कार्य व फर्क महसूस हुआ
आज पापा के साथ पहली बार उनके कार्यालय गई। पहले मै समझती थी कि पापा डाक को इधर से उधर ले जाने वाला कार्य करते होंगे। सभी को यही बताती भी थी, लेकिन आज पता चला कि पापा को कम्प्यूटर, लैपटॉप जैसे उपकरण भी संचालित कर लेते हैं और उसी से कार्य करते हैं। पापा का कितना जिम्मेदारियों वाला कैश काउंटर संभालने का कार्य है। मै पापा के कार्य से प्रभावित हॅू, उन्होंने कम्प्यूटर चलाना कब और कहां सीखा जरुर जानूंगी।- नेहा

Image may contain: one or more people, people standing, outdoor and water
विभाग का  नाम- एमएलबी स्कूल बालाघाट
बिटिया का नाम- आरोही शर्मा।
पिता       - उमेश शर्मा। (टीचर)

पापा के साथ शिक्षक बन पढ़ाया
रोज-रोज स्कूल जाकर पढ़ाई करना काफी बोर गई थी, मुझे लगता था कि बच्चों को पढ़ाना व होमवर्क देना कितना सरल कार्य है। लेकिन आज जब पापा के साथ खड़े होकर ब्लेक बोर्ड पढ़ाने का अनुभव किया तो पचा कि टीचर का कार्य भी बच्चों का खेल नहीं है। टीचर की तरह पढ़ाना बहुत अच्छा लगा, लेकिन बड़ी होकर आईएएस आफसर बनाना चाहूंगी ताकि देश की सेवा कर सकूं।- आरोही


विभाग का  नाम- चेस्ट क्लीनिक बालाघाट।
बिटिया का नाम- सोनाक्षी बोकड़े।
पिता       - डॉ नरेन्द्र बोकड़े (हृदय रोग विशेषज्ञ)

मैने भी पापा के साथ किया उपचार
मैने पहली बार अपने पापा को दूसरों का उपचार करते करीब से देखा और जाना है। पापा गरीब वर्ग का काफी कम फीस में ही उपचार कर देते हैं वे उन्हें दुआएं देते हैं। मै भावुक भी हुई और उन्होंने मुझे स्टेथोस्कोप लगाकर कैसे दिल की धड़कन से मर्ज पता किया जाता है बताया, हालाकि अभी कुछ समझ नहीं आया। लेकिन मै बड़े होकर अपनी मम्मी व पापा की तरह ही बड़ी डॉक्टर बनाना चाहूंगी।- सोनाक्षी
Image may contain: 2 people, people sitting and indoor

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned