हौसलों से हारी दिव्यांगता, यहां क्लिक करें पढ़े पूरी खबर

Prashant Sahare

Publish: Nov, 29 2016 04:10:00 (IST)

Balaghat, Madhya Pradesh, India
 हौसलों से हारी दिव्यांगता, यहां क्लिक करें पढ़े पूरी खबर

दिव्यांग दीपक राणा का मप्र वित्त सेवा में जिला कोषालय अधिकारी पद पर चयन

बालाघाट. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है...। 
यह शेर उन विकलांगों पर सटीक बैठता है, जिन्हें जन्म से ही विकलांगता का अभिशाप मिला था, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी और इस अभिशाप को दरकिनार कर उसे अपनी ताकत बना लिया। सभी में कोई न कोई हुनर ऐसा है, जिसे देखकर लोग चकित रह जाते हैं। ऐसा कुछ कर दिखाया बालाघाट जिले के छोटे गांव जरेरा के रहने वाले दीपक लाखन राणा ने। 
दरअसर जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग दीपक ने जीतोड़ मेहनत व लगन से पढ़ाई की। इसका फलसफा यह रहा कि आज वे मप्र लोक सेवा आयोग राज्य सेवा परीक्षा 2014 में चयनित होकर मप्र वित्त सेवा में जिला कोषालय अधिकारी के पद का मुकाम हासिल किया है। 
प्रशासनिक अधिकारियों के इस उच्च पद को पाने की खबर लगने के बाद परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। वहीं उन्हें शुभकामनाएं देने वाले भी बड़ी संख्या में उनतक पहुंचे रहे हैं।
पत्रिका से सांझा किए अनुभव
पत्रिका ने सोमवार को दीपक से मुलाकात कर विशेष चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभव व जीवन में किए गए संघर्षो को सांझा किया। 
जरेरा के किसान लाखन राणा के ज्येष्ठ सुपुत्र दीपक के अनुसार बेसिकली तो वे जरेगांव के रहने वाले हैं, लेकिन शिक्षण कार्य व अन्य कारणों से वे शहर मुख्यालय के प्रेमनगर वार्ड नंबर 26 में रह रहे हैं। बचपन से दिव्यांग  दीपक ने प्राइमरी से हायर सेकण्डरी तक की शिक्षा बालाघाट के ही एक निजी स्कूल विवेक ज्योति से पूरी की। इसके बाद स्नातक की पढ़ाई करने जबलपुर चले गए। वही उन्होंने बीई इलेक्ट्रानिक कम्युनिकेशन की पढ़ाई  ज्ञानगंगा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से पूरी की। इसके बाद पारिवारिक परेशानियों के चलते उन्होंने सन 2014- 15 में बालाघाट में ही नगरपालिका परिषद में संपरीक्षक वित्त विभाग के पद पर पदस्थ हो गए। लेकिन इस पद पर रहकर देशहित में कुछ अतुलनीय न कर पाने के कारण उन्होंने नौकरी पर रहते हुए मप्र लोक सेवा आयोग परीक्षा में शामिल हुए और आज जिला कोषालय अधिकारी के लिए चयनित हुए हैं। 

दीपक का कहना है कि यदि किसी चीज को करने या पद को पाने की ठान लो तो कोई भी अढ़चन व कठिनाई आपकों को रोक नहीं सकती है। उन्होंने दिव्यांगों के लिए भी संदेश दिया कि पहले आपकी दिलचस्पी हो पहचान कर चयनित करें, फिर उसे पाने पूरी तरह से स्वयं को समर्पित कर दें इसके बाद कामयाबी स्वयं ही आपके कदम चूंमेगी।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned