फाइलों में सुगम्य भारत दिव्यांग भाई-बहन वर्षों से लगा रहे ट्राई साइकिल के लिए चक्कर

Balod, Chhattisgarh, India
फाइलों में सुगम्य भारत दिव्यांग भाई-बहन वर्षों से लगा रहे ट्राई साइकिल के लिए चक्कर

जिले के दो सगे दिव्यांग भाई-बहन शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ट्राइसिकल की मांग करते थक चुके दोनों दिव्यांग कलक्टर के पास गुहार लगाई।

बालोद.जिले के दो सगे दिव्यांग भाई-बहन शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ट्राइसिकल की मांग करते थक चुके दोनों दिव्यांग कलक्टर के पास गुहार लगाई। वे शासन योजनाओं का लाभ चाहते हैं। वे आवेदन देकर ट्राइसिकल की मांग रखी। वहीं कलक्टोरेट में दिव्यांगों के चढऩे व उतरने के लिए रैंप सुविधा नहीं होने से घिसटकर कलक्टर के दरबार तक पहुंचे। यहां जिला बनने के 4 साल बाद भी दिव्यांगों के सुगमता से आने-जाने के लिए रैंप ही नहीं बनाया जा सका है।

बताई परेशानी
ग्राम खुन्दनी के दिव्यांग भाई-बहन बिरजो बाई साहू पिता गंगा राम (40) व सगा भाई नारायण साहू (45) ने जनदर्शन में आकर अपनी परेशानी बताई। दिव्यांग बिरजो ने बताया वह बचपन से दोनों पैर से दिव्यांग है। वहीं भाई 14 साल की उम्र में दिव्यांग हो गया था। दोनों ने पत्रिका को आपबीती बताई। दिव्यांग नारायण ने बताया वह बचपन में ठीक था। पढ़ाई करने अपने दोस्तों के साथ पैदल जाता था, पर जब कक्षा 9वीं पढ़ रहा था तब अचानक पैर व कमर के हिस्से पर दर्द हुआ, फिर वह दोनों पैर से दिव्यांग हो गया। 31 साल से वे दोनों पैर से परेशान हैं। इलाज में लाखों रुपए खर्च कर डाले पर पैर ठीक नहीं हुआ।

अब तो बनाओ रैम्प, कब तक दिव्यांग होंगे शासकीय संस्थाओं में भी परेशान
जिला कलक्टोरेट के अंदर तक प्रवेश के लिए दिव्यांगों के लिए अभी तक सुविधा नहीं दी जा सकी है। दिव्यांग जब कलक्टोरेट कार्यालय में जाते हैं तो सीढिय़ां घिटकर अंदर जा पाते हैं और वैसे ही उतरते हैं। रैंप नहीं होने के कारण भारी परेशानियों का सामना दिव्यांगों को करना पड़ता है। यह परेशानी 4 साल से हो रही है। वहीं जिलेभर में दिव्यांगों के लिए कई योजना जारी है, पर यहां नहीं।

भाई-बहन दोनों का हाथ ही सहारा
दिव्यांग नारायण ने बताया 20 साल पहले ग्राम बड़भूम में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उसे ट्राइसिकल मिली थी, पर वह टूट गई है। बहन को आज तक ट्राइसिकल नहीं मिली। इस कारण एक ही सहारा रह गया है हमारा दोनों हाथ। हाथ के सहारे ही एक से दूसरी जगह तक आना-जाना करते हंै। बताया कि अब तक हमारा दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाया है। ट्राइसिकल व मेडिकल प्रमाण पत्र की मांग कलक्टर से की है।

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