अब करो या मरो आंदोलन करेंगे किसान

Shankar Sharma

Publish: Jul, 17 2017 09:26:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
अब करो या मरो आंदोलन करेंगे किसान

महादयी नदी के पानी की मांग को लेकर गदग जिले के नरगुंद में किसान आंदोलन दो साल पूरे होने पर अब करो या मरो के स्तर पर पहुंच गया है

बेंगलूरु. महादयी नदी के पानी की मांग को लेकर गदग जिले के नरगुंद में किसान आंदोलन दो साल पूरे होने पर अब करो या मरो के स्तर पर पहुंच गया है।

दो साल से चल रहे आंदोलन के दौरान कई आयामों से गुजरने के बावजूद किसानों का जोश अभी तक ठंडा नहीं पड़ा है। रविवार को आंदोलन की दूसरी बरसी पर नरगुंद कस्बे में हजारों किसानों ने रैली निकालकर महादयी नदी के पानी की मांग की और कहा कि पानी के बदले में वे अपने प्राण तक न्यौछावर करने को तैयार हैं।
 
बेलगावी, धारवाड़, गदग तथा हावेरी जिलों से वाहनों में सवार होकर नरगुंद पहुंचे किसानों ने महादयी जल विवाद को निपटाने में रुचि नहीं दिखाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी  की। जुलूस के बाद किसान नेता के. एस. पुट्टणय्या व चामरस ने किसानों के सम्मेलन को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि  दोनों सरकारें तत्काल इस नदी विवाद को सुलझाने की दिशा में पहल करें वरना आने वाले समय में होने वाली अप्रिय घटनाओं के लिए वे ही जिम्मेदार होंगे। कई मठ प्रमुखों ने भी किसानों के जुलूस में भाग लिया।

पिछले दो साल के दौरान यह आंदोलन कई बार कर्नाटक बंद, किसानों का पुलिस के हाथों उत्पीडऩ, गिरफ्तारियां, फिल्म जगत का समर्थन, घेराव सहित अनेक चरणों से गुजरा है लेकिन केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा विवाद सुलझाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं करने की वजह से किसानों का सब्र अब टूटने लगा है। इसलिए उन्होंने आंदोलन और तेज करने का निर्णय किया है।

बहरहाल, किसानों के जुलूस को देख कर स्थानीय व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। परिवहन निगम ने एहतियात के तौर पर किसान सम्मेलन खत्म होने तक सरकारी बसें नहीं चलाई और सम्मेलन के बाद बस सेवाएं बहाल कर दीं। पुलिस ने डीएआर, केएसआरपी की टुकडिय़ों को तैनात कर पूरे कस्बे के संवेदनशील इलाकों में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे।

गौरतलब है कि इस परियोजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार कई बार केंद्र से दखल देने की अपील कर चुकी है। पंचाट ने भी संबंधित राज्यों को आपसी बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दी थी लेकिन कई बार प्रयास के बावजूद एक बार बातचीत को लेकर सहमति बनी भी तो गोवा के मुख्यमंत्री ने अचानक बैठक में आने से मना कर दिया। पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने फिर से गोवा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बातचीत के लिए समय देने की अपील की है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned