फीकी पड़ी रेशम की चमक

Mukesh Sharma

Publish: Dec, 01 2016 05:05:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
फीकी पड़ी रेशम की चमक

रेशम उत्पादन के लिए मशहूर राज्य के रामनगर जिले में किसानों के चेहरे पर मायूसी है। रेशम का उत्पादन

बेंगलूरु।रेशम उत्पादन के लिए मशहूर राज्य के रामनगर जिले में किसानों के चेहरे पर मायूसी है। रेशम का उत्पादन करने वाले इन किसानों का कारोबार नोटबंदी के बाद थम सा गया है और आय घट गई है। किसान जल्दी से जल्दी इस विकट स्थिति से निकलना चाहते हैं मगर उन्हें कोई राह नजर नहीं आ रही।


  रामनगर जिले के अंतर्गत तुलसी दौड़ी गांव में लगभग हर घर में रेशम का कारोबार होता है। आईटी सिटी से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में लगभग 8 0 घर हैं और यहां की जनसंख्या लगभग 750 है। इनकी आजीविका रेशम के कारोबार पर ही टिकी है। मगर नोटबंदी ने इन्हें परेशानी में डाल दिया है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद रेशम की कीमतों में भारी गिरावट आई है। नगदी की कमी के कारण पहले जहां एक किलो रेशम की कीमत 450 रुपए थी, वहीं अब इसकी कीमत 200 से 230 रुपए रह गई है।

  नरेंद्र नायक नामक एक किसान ने कहा 'हमारी परेशानी सिर्फ कीमतों में गिरावट को लेकर ही नहीं हैं। जो मजदूर काम पर आते हैं, उन्हें उनकी मजदूरी देना मुश्किल हो गया है। मजदूरी नगद देनी पड़ती है और नगद पैसा उनके पास है ही नहीं। इस गांव में न तो एटीएम है और न ही कोई बैंक शाखा। उन्हें पैसा निकालने के लिए 7 किलोमीटर दूर कनकपुरा जाना पड़ता है। मगर वहां भी सिर्फ दो हजार रुपए मिलते हैं।Ó

दरअसल, नोटबंदी के कारण आम जनजीवन जहां प्रभावित हुआ है, वहीं कल-कारखाने, दूध के कारोबार से लेकर खेती-बाड़ी और रेशम उत्पादन पर भी असर हुआ है। लोगों के पास जो भी नकदी है, उससे रोजमर्रा की जरूरतें ही पूरी हो पा रही हैं और ऐसे में रेशम कारोबार के प्रति उदासीन होना सहज है। शिवशंकर नामक एक अन्य रेशम उत्पादक किसान ने कहा 'बाजार में पहले से ही चीन के रेशम भरे हैं। इससे देशी रेशम की मांग में गिरावट आई है।

नोटबंदी के बाद तो हालत और खराब हो गई है। हमारी खुशियां चली गई हैं। जिस किसान के पास रेशम है उसे पैसे नहीं मिलते और जिनके पास पैसे हैं, उन्हें छुट्टे नहीं मिलते।

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