इसरो का रिमोट सेंसिंग यूएवी कमाल का

Shankar Sharma

Publish: Nov, 30 2016 12:53:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
इसरो का रिमोट सेंसिंग यूएवी कमाल का

उपग्रहों के जरिए संसाधनों के मानचित्रण, आपदा प्रबंधन व निगरानी सेवाएं प्रदान करने वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मानव रहित विमान (यूएवी अथवा ड्रोन) भी विकसित किया है जो दुर्गम

बेंगलूरु. उपग्रहों के जरिए संसाधनों के मानचित्रण, आपदा प्रबंधन व निगरानी सेवाएं प्रदान करने वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मानव रहित विमान (यूएवी अथवा ड्रोन) भी विकसित किया है जो दुर्गम पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरते हुए बड़े पैमाने पर मानचित्रण, रियल टाइम आकलन अथवा निगरानी संबंधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इसरो के पूवोत्तर अंतरिक्ष केंद्र (एनई-सैक) द्वारा विकसित यह यूएवी अपने परीक्षण में सौ फीसदी सफल रहा है और भविष्य में बेहतर सेवाएं देने के लिए तैयार है।

इसरो की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उसके पूर्वोत्तर केंद्र ने स्थानीय जरूरतों के हिसाब से एक एक हेक्स कॉप्टर (यूएवी) तैयार किया जो 2.5 किलोग्राम पे-लोड के साथ उड़ान भर सकता है। इसमें विभिन्न प्रकार के सेंसर जैसे थर्मल, मल्टीस्पेक्ट्रल, ऑप्टिल, हाइपर स्पेक्ट्रल और एलआईडीएआर लगाए जा सकते हैं।

केंद्र ने एक क्वाड कॉप्टर भी तैयार किया है, जिसमें ऑप्टिकल सेंसर लगे हैं और वह किसी स्थान विशेष का हाई-रिजोल्यूशन फोटो अथवा हाई-डिफिनिशन वीडियो उतार सकता है। वहीं केंद्र द्वारा तैयार फिक्सड विंग यूएवी का उपयोग निगरानी सेवाओं और मानचित्रण में लगातार किया जा रहा है। इससे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी आपदा से पूर्व तैयारियां करने में मदद मिल रही हैं और उसका इस्तेमाल योजनाएं तैयार करने में किया जा रहा है।

 इसरो केंद्र द्वारा तैयार मल्टी रोटोर यूएवी ने हाल ही में एनएच-40 के ऊपर उड़ान भरी और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का मानचित्रण किया। यह सड़क मेघालय को गुवाहाटी से जोड़ती है और इसे मेघालय की जीवन रेखा कहा जाता है। यहां अनगिनत भू-स्खलन हुए हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति हुई है।

मेघालय के आपदा प्रबंधन विभाग के आग्रह पर यूएवी द्वारा किया गया यह मानचित्रण समुचित कदम उठाने व योजनाएं तैयार करने में मददगार साबित होगा। इसी तरह, असम के मोरीगांव जिले में स्थित नामारी गांव में भी यूएवी ने एक अहम अध्ययन किया। दरअसल, यहां धान की फसल ब्राउन प्लांट होपर (बीपीएच) कीड़ों के कारण खराब हो रही थी।

असम के अधिकारियों के निवेदन पर इसरो केंद्र के यूएवी ने उड़ान भरी। लगभग 15 मिनट की उड़ान के दौरान न सिर्फ उन इलाकों के बारे में समुचित जानकारी उपलब्ध कराई जो बीपीएच कीड़ों से प्रभावित हैं बल्कि कुछ अहम आंकड़े भी प्राप्त किए गए। यूएवी के सेंसर ने बहुत अधिक प्रभावित, सामान्य रूप से प्रभावित और जो इलाके नहीं प्रभावित हैं उनके बारे में स्पष्ट भेद किया। इसी तरह मेघालय में नोंगपो शहर के करीब एनच-40 पर 120 मीटर की ऊंचाई पर 12 मिनट की उड़ान में यूएवी ने लगभग 0.8 4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का बड़े पैमाने पर मानचित्रण किया। इसरो ने कहा है कि यूएवी का उपयोग विभिन्न एप्लीकेशंस में बेहद कारगर साबित हो रहा है। हालांकि, इससे जुड़ी चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

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