युद्धकों के बीच टाइगर की खास पहचान

Mukesh Sharma

Publish: Feb, 17 2017 12:43:00 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
युद्धकों के बीच टाइगर की खास पहचान

यलहंका वायुसैनिक अड्डे पर ध्वनि की रफ्तार से उड़ते और गरजते विमानों के बीच एक खामोश टाइगर सबका ध्यान

बेंगलूरु।यलहंका वायुसैनिक अड्डे पर ध्वनि की रफ्तार से उड़ते और गरजते विमानों के बीच एक खामोश 'टाइगरÓ सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। भले ही अत्याधुनिक युद्धक रोमांच से भर देते हैं मगर इस 'टाइगरÓ का इतिहास और उससे जुड़ी यादें भी बरबस अपनी ओर खींचती हैं। यह टाइगर कोई और नहीं, द्वितीय विश्व युद्ध में अपना जलवा दिखा चुका और भारतीय वायुसेना के बेड़े से चरणबद्ध तरीके से बाहर हो चुका विंटेज एयरक्राफ्ट टाइगर मॉथ है, जो एयरो इंडिया में यहां अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई के साथ खड़ा है।


टाइगर मॉथ के साथ उड़ान भरने वाले विंग कमांडर प्रशांत नायर वैमानिकी प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान (एएसटीई) के सिद्धहस्त पायलट हैं और वे सुखोई में उड़ान भरते हैं। लेकिन, एयरो इंडिया में टाइगर मॉथ के साथ बेंगलूरु पहुंचे नायर ने कहा कि इस विमान को उड़ाने का अपना अलग मजा है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयर बेस से यलहंका का सफर नायर ने 23 घंटे में पूरा किया, लेकिन इसमें पांच दिन लग गए और 12 स्थानों पर उन्हें लैंड करना पड़ा। सुपरसोनिक सुखोई के पायलट ने कहा 'टाइगर मॉथ में उड़ान भरते हुए नदियों, पहाड़ों, बगीचों और किलों का मनोरम दृश्य बेहद रोमांचित करता है। सुखोई के साथ यह आनंद नहीं मिलता। आकाश से धरती के बेहद मनोरम दृश्य इस विमान से देख सकते हैं।Ó

लकड़ी का बना मगर धातुई ईंधन टैंक वाले इस विमान में अधिकतम 19 गैलन (8 5 लीटर) ईंधन भरा जा सकता है और एक उड़ान में यह ढाई घंटे तक की यात्रा करता है। हिंडन एयरबेस से यलहंका की यात्रा से जुड़े यादगार पलों को साझा करते हुए नायर ने मजाकिया लहजे में कहा 'मैंने टोल गेट पर ही कारों और ट्रकों से ओवरटेक करने में सफलता हासिल की।Ó दरअसल, टाइगर मॉथ 130 से 139 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से उड़ान भरता है,

 जबकि एक्सप्रेस-वे पर कार तथा अन्य वाहन भी आसानी से इतनी रफ्तार पकड़ लेते हैं। उन्होंने कहा 'एक्सप्रेस-वे पर कार तथा अन्य वाहन उनसे आगे निकल जाते थे। मैं इसका आदी नहीं हूं क्योंकि मुझे मैक-2 की गति से सुखोई उड़ान की आदत है। लेकिन, जब टोल बूथ पर ये वाहन रुकते थे तो मैं उनसे ओवरटेक करने में सफल रहा।Ó दरअसल, 1930 के दशक के प्रशिक्षु विमान टाइगर मॉथ को वर्ष 2007 में फिर से उन्नत कर पुरानी यादें ताजा की गईं। अब यह विमान हर एयर शो में आकर्षण का केंद्र बनता है। टाइगर मॉथ को देखने के लिए जमा हुई भीड़ में से एक दर्शक ने कहा कि यह विंटेज एयरक्राफ्ट अपने साथ एक इतिहास लेकर उड़ान भरता है। जब भी इसे देखते हैं, इतिहास के वे पन्ने फिर एक बार खुल जाते हैं।


टाइगर मॉथ के पायलट नायर ने कहा 'इसमें उड़ान भरना एक अलग चुनौती है। इसे उड़ान के लिए अलग तरह के कौशल की आवश्यकता होती है। लेकिन, इसमें उड़ान भरने पर एक अलग संतोष का अनुभव होता है। मुझे इसमें उड़ान भरने में मजा आता है। यलहंका पहुंचने के दौरान मैंने जयपुर में सूर्योदय का अद्भुत दृश्य देखा। टाइगर मॉथ में उड़ान का हर लम्हा यादगार है।Ó


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