दलपत में खोखसी, चांदली समेत 10 देसी मछलियों का होगा संरक्षण

Jagdalpur
 दलपत में खोखसी, चांदली समेत 10 देसी मछलियों का होगा संरक्षण

लुप्त प्रजातियों को बचाने व दलपत सागर में जैव विविधता बनाए रखने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय की ओर से पहली बार की जा रही पहल

विक्रम साहू/जगदलपुर. शहर के सबसे बड़े तालाब दलपत सागर में जलकुंभी की सफाई के बाद यहां लुप्त हो रही देसी मछलियों की 10 प्रजाति का संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा।

इसके अलावा जैव विविधता बनाए रखने के लिए 10 तरह के जलीय पौधे भी यहां लगाए जाएंगे, जो मछलियों के लिए भोजन और तालाब में जलीय वातावरण को व्यवस्थित रखेंगे।
10 Species protection
राज्य में पहली बार देसी मछलियों की लुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय की ओर से यह पहल की जा रही है।

इसके लिए दलपत सागर की मछलियों को निकाल कर शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय स्थित तालाब में रखा जाएगा। यहां सभी प्रजातियों को अलग-अलग करके ब्रीडिंग की जाएगी। इसके बाद इन मछलियों के बड़े होने के बाद इसे  दलपत सागर में छोड़ दिया जाएगा।

देसी मछलियां
1. कोतरी (पंटियस) 2. खोखसी (जिवली) 3. बामी  4. चांदली 5. कीव 6. पीता कोतरी 7. खोखसी 8. रंगीन मछलियां 9. मेठिया, 10. बावरी

ये पौधे लगेंगे
1. टेटेंगी, 2. पोली गोनम
3. हाईड्रिला  4. पोटेमेगेटान 5. पुला  6. कमल फूल, 7. कमल बीज 8. कमल फल 9. घुला 10. कमल भांजी डंठल

डॉ. आदिकांत प्रधान, परियोजना प्रभारी, कृषि महाविद्यालय : वर्तमान में 10 प्रजातियों का ही संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा। आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। तालाब में जलीय वातावरण तैयार करने के लिए जलीय पौधे लगाए जाएंगे।  गंगामुंडा तालाब में भी यह प्रयास किया जाएगा। कृषि विवि के कुलपति ने भी इसमें सहमति प्रदान की है।

तोषण ठाकुर, मत्स्य विशेषज्ञ : देसी मछलियां विलुप्त हो रही है, इन्हें बचाने के लिए यह पहल की जा रही है।

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