पटना के संदीप दास को मिला ग्रैमी अवॉर्ड्स, भारतीय मीडिया को बताया मनोरंजक

Shribabu Gupta

Publish: Feb, 16 2017 05:47:00 (IST)

Begusarai, Bihar, India
पटना के संदीप दास को मिला ग्रैमी अवॉर्ड्स, भारतीय मीडिया को बताया मनोरंजक

बिहार की राजधानी पटना में जन्में तबला वादक संदीप दास को 59वें ग्रैमी अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया...

बेगूसराय/पटना। बिहार की राजधानी पटना में जन्में तबला वादक संदीप दास को 59वें ग्रैमी अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। उनको सिल्क रोड एन्सेंबल समूह के साथ बेस्ट ग्लोबल म्यूज़िक के लिए ग्रैमी अवॉर्ड दिया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए भारतीय मीडिया पर भी जमकर तंज कसे। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया को फिल्मों और खेलों की खबरों से ही फुर्सत नहीं मिलती, तो कला और संस्कृति को कहां तवज्जो देंगे।

संदीप ने मीडिया को से कहा,"जैसे ही घोषणा हुई कि हमारी एल्बम जीती है तो हम खुशी में खड़े हो गए. हमारा एक साथी तो खुशी में हमारी एल्बम का नाम भूल ही गया और कहा- अरे हमें नहीं मिला।"

भारतीय मीडिया पर निशाना
संदीप बताते हैं कि भारतीय मीडिया को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी ताकि लोगों का ध्यान संगीत, कला और संस्कृति पर जाए, "अब जब ग्रैमी मिला है तो फ़ोन बजने शुरू हैं। कहाँ था भारत का मीडिया पहले? मुझे सालों की मेहनत के बाद ग्रैमी मिला है।"

वे कहते हैं, "लानत है कि जब बाहर से ठप्पा मिला तो ध्यान देते हैं. नहीं तो हमारी मीडिया को फिल्मों से और क्रिकेट से फ़ुरसत नही. बाहर देश के अख़बारों में दो पन्ने आर्ट और संस्कृति पर हैं, यहां नहीं"

संदीप दास का जन्म पटना में 1971 में हुआ था। तबले के साथ उनका रिश्ता आठ साल की उम्र में शुरू हुआ। नौ साल की उम्र में तबला गुरु पंडित किशन महाराज के पास बनारस गए। फिर परिवार ही बनारस पहुंच गया। पंडित किशन महाराज के साथ महज़ 15 साल की उम्र में उन्हें स्टेज पर आने का मौका मिल गया वो भी पंडित रविशंकर के साथ। फिर 2000 में चीनी मूल के अमरीकी संगीतकार यो यो मा से मुलाक़ात ने संदीप की दुनिया बदल डाली।

गौरतलब हो कि 2003 और 2009 में भी ग्रैमी के लिए संदीप का नामांकन हुआ था पर उन्हें अवॉर्ड नहीं मिला। संदीप ने अंग्रेज़ी साहित्य में गोल्ड मेडल हासिल किया और इसका श्रेय भी वो तबले को ही देते हैं।

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