साजा के केले और पपीते के बाद अब खरबूज की मिठास एमपी, यूपी, बिहार और बंगाल तक

Bemetara, Chhattisgarh, India
साजा के केले और पपीते के बाद अब खरबूज की मिठास एमपी, यूपी, बिहार और बंगाल तक

केले और पपीते के बाद अब खरबूज की मिठास मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में साजा की पहचान बन रहे हैं।

बेमेतरा/साजा. केले और पपीते के बाद अब खरबूज की मिठास मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में साजा की पहचान बन रहे हैं। दीगर प्रदेशों से मिल रहे उत्साहवर्धक परिणाम को देखते हुए साजा अंचल के किसान धान, गेहूं, चना, सोयाबीन की बजाए इन नगद फसलों की अपना रुख करने लगे हैं।

खरबूज की खेती कर तरक्की
बीते साल टमाटर और सोयाबीन जैसे नगद फसल उगाने वालों किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। नौबत यहां तक आ गई थी कि सड़क पर ट्रैक्टर से फसल को कुचलकर कम कीमत को लेकर किसानों ने अपना रोष व्यक्त किया था। लेकिन दूसरी तरफ केले-पपीते के बाद खरबूज, तरबूज और मुनगा की व्यावसायिक खेती कर रहे किसान तरक्की करते जा रहे हैं।

10 एकड़ में बोई खरबूज
इन्हीं किसानों में से एक 12वीं तक की पढ़ाई करने वाले अंचल के युवा किसान अशोक राठी ने अपने 50 एकड़ के रकबे में 20 एकड़ में पपीता, 15 एकड़ में केला, 10 एकड़ में खरबूज और 2 एकड़ में मुनगा की खेती कर रहे हैं। राठी बताते हैं कि सभी से अच्छा उत्पादन हो रहा है। रोजाना अन्य राज्यों को फसल भेजा जा रहा है। इससे आमदनी भी अच्छी हो रही है। खरबूज को जहां 20 रुपए किलो और पपीता को 7 से 8 रुपए किलो में वे चिल्हर व्यापारियों को बेच रहे हैं।

खेती से ज्यादा आमदनी कहीं नहीं
अशोक राठी बताते हैं कि खेती से अच्छी आमदनी किसी और क्षेत्र में नहीं है। वे कहते हैं कि जिसके पास कृषि जमीन है, और मेहनत करने की हिम्मत है, उनके लिए खेती से अच्छा लाभकारी रोजगार कोई दूसरा नहीं है। यह युवा बेरोजगारो के लिए आमदनी और रोजगार का बेहतर साधन है। 

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