पीएस की मीटिंग बीच में छोड़ ज्ञापन लेने कलेक्टोरेट पहुंचे कलेक्टर 

Devendra Karande

Publish: Jun, 19 2017 09:26:00 (IST)

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पीएस की मीटिंग बीच में छोड़ ज्ञापन लेने कलेक्टोरेट पहुंचे कलेक्टर 

 गढ़ा डैम को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को डैम बनाए जाने के विरोध में दो सैकड़ा से अधिक ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टर की अनुपस्थिति में एसडीएम ज्ञापन लेने के लिए पहुंचे थे लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन सौंपने से इंकार कर नारेबाजी शुरू कर दी। जिसके बाद कलेक्टर शशांक मिश्र को प्रमुख सचिव की मीटिंग बीच में छोड़कर कलेक्टोरेट ज्ञापन लेने के लिए आना पड़ा।

बैतूल। गढ़ा डैम को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का विरोध शुरू हो गया है। सोमवार को डैम बनाए जाने के विरोध में दो सैकड़ा से अधिक ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टर की अनुपस्थिति में एसडीएम ज्ञापन लेने के लिए पहुंचे थे लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन सौंपने से इंकार कर नारेबाजी शुरू कर दी। जिसके बाद कलेक्टर शशांक मिश्र को प्रमुख सचिव की मीटिंग बीच में छोड़कर कलेक्टोरेट ज्ञापन लेने के लिए आना पड़ा। करीब आघे घंटे तक ग्रामीणों का प्रदर्शन कलेक्टोरेट में चलता रहा। इस दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कहा कि यदि किसानों की मांगों को पूर्ण किए बगैर डैम निर्माण की कार्यवाही स्थगित नहीं की जाती है तो किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।The villagers who oppose the creation of a solid d
कृषि भूमि डूब में जाने का विरोध 
ग्रामीणों का कहना था कि गढ़ा डैम के अंतर्गत डूब क्षेत्र के सभी प्रभावित होने वाले किसान यह मांग करते हैं कि डैम निर्माण में डूब में जाने वाली भूमि 100 प्रतिशत सिंचित एवं उपजाऊ है। इस प्रकार की भूमि को डूबाकर डैम बनाया जाना अवैधानिक है। क्षेत्र के कृषक इस बात को धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से पूर्व में शासन-प्रशासन को अवगत कराते चले आ रहे हैं लेकिन किसानों की बात को उपेक्षित कर मनमाने तौर पर सर्वे कर डैम निर्माण की कार्रवाई निरंतर अग्रसर है। डैम निर्माण को लेकर ग्रामीणों में खासा आक्रोश भी है। यदि गांव में डैम का निर्माण बगैर हमारी मांगों का निराकरण किए किया जाता है तो हम समस्त ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद विधायक के निवास पर भी पहुंचे थे। 
यह है ग्रामीणों की मांग
1. गढ़ा डैम न बनाकर माचना नदी पर बैराज बनाया जाए। जिससे उपजाऊ भूमि नहीं डूबेगी। बैराज निर्माण से किसानों को भी कोई आपत्ति नहीं है।
2. यदि गढ़ा डैम का निर्माण किया जाता है तो किसानों को उचित मुआवजा चार गुना दिया जाए। अन्यथा डैम निर्माण निरस्त किया जाए। 

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