पंजाब में सरकारी गाडिय़ों पर नहीं दिखेगी लालबत्ती

Yuvraj Singh

Publish: Mar, 19 2017 12:57:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
पंजाब में सरकारी गाडिय़ों पर नहीं दिखेगी लालबत्ती

पहली कैबिनेट बैठक में अमरिंदर ने खत्म किया वीआईपी कल्चर, स्वयंभू वीआईपी की सुरक्षा में लगे छह हजार जवान हटाए

चंडीगढ़। पंजाब की नवगठित कांग्रेस सरकार ने मंत्रीमंडल की पहली बैठक में अहम फैसला लेते हुए प्रदेश से वीआईपी कल्चर समाप्त कर दिया है। पंजाब देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां के विधायकों,मंत्रियों और मुख्यमंत्री ने सत्ता में आते ही सबसे पहला निर्णय अपनी गाडिय़ों पर लगी बत्ती हटाने तथा सुरक्षा कर्मियों में कटौती करने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य के सभी विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री के अलावा सचिव, निदेशक स्तर के अधिकारी, पुलिस महानिदेशक, जिलों में तैनात एसपी,डीसी, एडीसी तथा एसडीएम अपनी गाडिय़ों पर बत्ती नहीं लगाएंगे।

सरकार ने यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया। मंत्रीमंडल की बैठक समाप्त होने तक अधिकतर वीआईपी ने अपनी गाडिय़ों पर लगी लाल,नीली तथा नारंगी बत्तियां भी उतार दी। इसके अलावा आज की बैठक में फैसला लिया गया कि पंजाब में अब कोई भी मंत्री, मुख्यमंत्री तथा विधायक न तो आधारशिलाओं पर अपना नाम लिखेगा और न ही उदघाटनी पत्थर रखे जाएंगे। अब केवल संबंधित प्रोजैक्ट का नाम लिखते हुए कहा जाएगा कि यह जनता द्वारा दिए गए करों की राशि से तैयार किया गया प्रोजैक्ट है।

इसके अलावा पंजाब सरकार ने दूसरा बड़ा अहम फैसला लेते हुए ऐलान किया कि पंजाब के सभी विधायक,मंत्री और मुख्यमंत्री हर साल अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करेंगे। इस फैसले की जानकारी देते हुए राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि हर साल एक जनवरी को सभी विधायक अपनी-अपनी संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा के टेबल पर रखेंगे। इसे पूरी तरह से सार्वजनिक एवं पारदर्शी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जल्द ही लोकपाल विधेयक लाया जाएगा जोकि अन्ना हजारे के बिल से भी मजबूत होगा।

आज की बैठक में यह बात भी सामने आई की पूर्व की अकाली-भाजपा सरकार ने थोक के भाव में नेताओं वीआईपी की संज्ञा देते हुए उनकी सुरक्षा में पुलिस कर्मियों को तैनात कर रखा था और पुलिस थानों व चौकियों में कर्मचारियों का अभाव था। जिसके चलते आज पंजाब सरकार ने पिछले कई वर्षों से वीआईपी सुरक्षा में लगे हुए पुलिस के छह हजार जवानों को तत्काल प्रभाव से वापस बुला लिया है। इन जवानों को संबंधित जिलों के पुलिस थानों में तैनात किया जाएगा। वीआईपी डयूटी में लगे हुए जवानों को वापस बुलाने से पंजाब के पुलिस थानों में कर्मचारियों की कमी को कुछ राहत मिलेगी।

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