इस मस्जिद में मुस्लिम पालते हैं गाय, आज भी जीवित है यहां 65 साल पुरानी परंपरा

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  इस मस्जिद में मुस्लिम पालते हैं गाय, आज भी जीवित है यहां 65 साल पुरानी परंपरा

मोहम्मद अहमद बताते हुए यह जोड़ते हैं कि हम कोई अनोखा काम नहीं कर रहे आप प्रदेश के चंद मदरसों का जायजा लें तो कई जगहों पर गायें पलती हुई मिल जाएंगी।

भोपाल. इन दिनों उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में हिन्दू-मुस्लिम एकता में फूट डालने की हर संभव कोशिश की जा रही है। पर, इस कोशिश का असर न तो UP में दिख रहा है और न ही देश के अन्य राज्यों में। आपको हम आज एक ऐसी मस्जिद के बारे में बताने जा रहा हूँ, जो हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता है। आपको जानकर खुशी होगी कि एक मस्जिद में गोशाला है, जिसमें 15 गायों की सेवा की जाती है। 10 भैसें भी हैं। सभी का दूध मस्जिद में संचालित मदरसे के बच्चों को दिया जाता है। 



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जी हां, हम बात कर रहे हैं भोपाल से करीब 50 किमी दूर तूमड़ा की दारुम उलूम हुसैनिया मस्जिद की, जहां जुबेर दुआ, नमाज और दीनी तालीम के बीच गोसेवा भी करते हैं। आपको यह जानकर हैरत होगी कि मौलाना मुफ्ती अब्दुल रज्जाक की ओर से संचालित इस गोशाला में चार दशकों से गायों की सेवा हो रही है। तूमड़ा गांव इंदौर रोड पर टोल नाके से लगभग एक किमी पहले दाईं ओर मुडऩे वाली रोड पर लगभग दो किमी अंदर है। दारुम उलूम हुसैनिया मस्जिद गांव की शुरुआत में ही है। इस मस्जिद और मदरसे के साथ गोशाला भी है।

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अब्दुल रज्जाक के बेटे मोहम्मद अहमद ने कहा कि मैंने जबसे होश संभाला घर में गायों को देखा है, कभी यह महसूस नहीं हुआ कि हमारा परिवार कुछ अलग कर रहा है। यकीन मानिए बीते सात-आठ सालों में वहम फैलाया गया है कि अमुक जानवर को कोई कौम नहीं पालती या उसे मार देती है।  पूरी दुनिया में लोग गाय का दूध पीेते हैं, इसके दूध में शिफा (आरोग्य) होता है, एेसे में कोई गाय क्यों नहीं पालेगा, उसकी सेवा क्यों नहीं करेगा? अब्दुल रज्जाक ने 1952 में शहर में मोती मस्जिद के पास तर्जुमे वाली मस्जिद के साथ सीहोर के पास इस मस्जिद, मदरसे और गोशाला की शुरुआत की थी। आज 10 भैसें, 40 बकरियों के साथ 15 गायें भी पल रही हैं।

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अच्छी नस्ल की गायें
अच्छी नस्ल की ये गायें हष्ट-पुष्ट हैं। गोशाला की देखरेख करने वाले जुबेर बताते हैं, इन गायों और बछड़ों से हम सभी को लगाव हो गया है। मोहम्मद अहमद बताते हुए यह जोड़ते हैं कि हम कोई अनोखा काम नहीं कर रहे आप प्रदेश के चंद मदरसों का जायजा लें तो कई जगहों पर गायें पलती हुई मिल जाएंगी।

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