PM मोदी कुछ भी कहें, इस स्टेट में 95% डॉक्टर नहीं लिखते जेनेरिक दवा, पढ़ें रिपोर्ट...

Brajendra Sarvariya

Publish: Apr, 19 2017 10:07:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
PM मोदी कुछ भी कहें, इस स्टेट में 95% डॉक्टर नहीं लिखते जेनेरिक दवा, पढ़ें रिपोर्ट...

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के कोड ऑफ प्रोफेशनल कंडक्ट में स्पष्ट कहा गया है कि हर डॉक्टर जेनरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करेगा। लेकिन डॉक्टर जमकर महंगी कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं।

भोपाल। प्रधानमंत्री भले ही जेनरिक दवाओं के लिए कानून लाने की बात कर रहे हों लेकिन अभी इस संबंध में जो मौजूदा नियम कानून हैं उन्हीं का पालन नहीं हो रहा है। जिम्मेदार भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। एमपी के 95 फीसदी डॉक्टर्स जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में ये फैक्ट सामने आया था। दरअसल डॉक्टर्स और मेडिसिन कंपनियों के बीच साठगांठ के चलते ये स्थिति बनी हुई है। आइए हम बताते हैं इस रिपेाट के कुछ और फैक्ट....




दामों में भारी अंतर 
अलग-अलग कंपनियों की एक ही कंपोजीशन की दवाओं की कीमत में भी जमीन आसमान का अंतर है। सिप्रोफ्लोक्सेसिन एंटीबायोटिक को देखें तो सिफेक्सेमाइन ब्रांड नेम से 500 एमजी की 10 टेबलेट जहां 300 रुपए की आती हैं वहीं महासेप 100 रुपए में मिलता है। विभिन्न कंपनियों के मॉक्सीफ्लोक्सेसिन आई ड्रॉप की कीमत 45 से 360 रुपए तक है। एलर्जी में उपयोग की जाने वाली सिट्रिजिन एक कंपनी की 10 टेबलेट 36 रुपए की आती हैं तो दूसरी की मात्र 12 रुपए की। 




चर्चा करने से भी बच रहे जिम्मेदार 
एमसीआई के कोड ऑफ कंडक्ट के बारे में जब एमसीआई के मप्र से मेंबर डॉ. भरत अग्रवाल से बात करना चाही तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। वहीं जॉइंट कंट्रोलर फूड एंड ड्रग प्रमोद शुक्ला ने कहा यह हमारे वश में नहीं है। दूसरे अधिकारियों से बात करने की बात कही। ?




क्या कहता है कोड ऑफ कंडक्ट?
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के कोड ऑफ प्रोफेशनल कंडक्ट में स्पष्ट कहा गया है कि हर डॉक्टर जेनरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करेगा। लेकिन डॉक्टर जमकर महंगी कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं। एमसीआई के कोड ऑफ प्रोफेशनल कंडक्ट एटीकेट एंड इथिक्स के प्रावधान 1.5 में यह कहा गया है कि हर डॉक्टर जहां तक संभव हो रोगियों को जेनरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करेगा एवं यह सुनिश्चित करेगा कि दवाओं का रेशनल प्रिस्क्रिप्शन एवं उपयोग किया जाए। इससे साफ जाहिर है कि डॉक्टरों को एक तो बड़ी कंपनियों की महंगी ब्रांडेड दवाओं को लिखने की बजाय उनके जेनरिक नाम अपने प्रिस्क्रिप्शन में लिखने चाहिए। लेकिन कुछेक सरकारी अस्पतालों को छोड़कर अधिकतर डॉक्टर इसका पालन नहीं कर रहे हैं। 




विभाग को लिखा था पत्र
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने फरवरी 2017  में मप्र के स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा था। इसमें बताया गया है कि प्राइवेट के साथ कई शासकीय डॉक्टर भी एमसीआई के कोड ऑफ कंडक्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद स्वास्थ्य संचालक (अस्पताल प्रशासन) डॉ केके ठस्सू ने सभी सीएमएचओ और सिविल सर्जन को इसका पालन कराने के निर्देश जारी किए। डॉ ठस्सू के अनुसार सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि सभी डॉक्टरों से नियम का पालन कराया जाए। को लिखित में जेनरिक दवाएं ही लिखने के प्रावधान का सख्ती से पालन करने के लिए निर्देशित करें। इसके साथ आईएमए, फॉगसी, एपआई, नर्सिंग होम एसोसिएशन, प्राइवेट प्रेक्टिशनर आदि के पदाधिकारियों को भी इस प्रावधान का पालन करने के लिए निर्देशित करें।

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