अनोखे पेड़ के नीचे होती हैं शादियां, देवताओं से भी ज्यादा इसकी मान्यता

Bhopal, Madhya Pradesh, India
  अनोखे पेड़ के नीचे होती हैं शादियां, देवताओं से भी ज्यादा इसकी मान्यता

उत्तर प्रदेश से आई बारात, नेकी के पेड़ के नीचे से उठी गरीब की बेटी की डोली, अफसरों ने निभाए सारे रीति-रिवाज

सीहोर। मध्यप्रदेश की धरती पर दो अनोखे पेड़ हैं। एक विदिशा जिले के सांची में, जिसकी सुरक्षा वीवीआईपी लोगों की तरह होती है, जबकि दूसरा भोपाल से 35 किमी दूर सीहोर में। दोनों ही पेड़ों की अपनी खासियत है। पहला उसी बोधि वृक्ष का हिस्सा है, जहां महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था, जबकि दूसरा की खासियत ये है कि इस पेड़ की मान्यता देवताओं से भी ज्यादा है। सीहोर के इस पेड़ के नीचे दो दिन पहले ही एक अनोखी शादी हुई। दूल्हा और बारात उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से आए थे। पेड़ को साक्षी मानकर एक गरीब की बेटी की डोली यहीं से उठाई गई। आइए हम बताते हैं इस पेड़ की आखिर इतनी मान्यता क्यों है...







कहलाता है नेकी का पेड़
ये पेड़ सीहोर तहसील कार्यालय परिसर में है। इसे लोग 'नेकी का पेड़' कहते हैं। दो दिन पहले इसके नीचे जब शहनाइयां गूंजी तो लोग जुट गए। मौका था गरीब लड़की की शादी का। बेटी के परिवार वालों की ओर से एसडीएम राजकुमार खत्री, तहसीलदार संतोष मुदगल मौजूद थे। शादी में वधू को नेकी के दाताओं ने उपहार दिएं, वहीं पूरा राजस्व अमले घराती की तरह रिश्तेदारों की खातिर करता दिखाई दिया।





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समाज ने निभाई बड़ी जिम्मेदारी
खड़े हनुमान मंदिर रोड निवासी कृष्णा बाई ने बताया कि उसकी दो बेटियां है। बेटियों के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से दोनों बेटियों के हाथ पीले होनेे थे। पत्रिकाएं भी छपवा ली थी, लेकिन एन मौके पर छोटी बेटी रितु का विवाह अटक गया। उसकी बेटी रितु का विवाह उत्तरप्रदेश के मथुरा निवासी फूलचंद के पुत्र नरेश से तय हुआ था, लेकिन आईडी, आधार कार्ड नहीं मिलने के कारण  योजना में उनके आवेदन पर विचार नहीं हो सका। उन्होंने यह बात एसडीएम राजकुमार खत्री को बताई थी।




विधि-विधान से हुई शादी
एसडीएम ने बताया कि अचानक इस तरह का मामला सामने आने पर गरीब कन्या का विवाह नेकी के पेड़ के नीचे कराने का निर्णय लिया गया। सोमवार को नेकी के पेड़ के नीचे गायत्री मंत्रोच्चरण विधि-विधान के साथ विवाह कराया गया। नेकी के दाता और अफसरों ने मिलकर रितु के लिए गृहस्थी का सामान, कपड़ा और फर्नीचर खरीदकर दिया गया। सोमवार को दिनभर नेकी के पेड़ की नीचे कन्या की शादी में शहनाइयां गूंजती रही।


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इसलिए अनोखा है ये पेड़
पर्यावरणविद बताते हैं कि इस पेड़ की उम्र करीब 350 साल है। लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। इस अनोखे पेड़ को यहां के रहवासी देवताओं से भी ज्यादा मान-सम्मान देते हैं। लोगों का कहना है कि इस पेड़ से आप अपने मन की बात भी कह सकते हैं और वो बात कुछ ही दिन में पूरी भी हो जाती है। पेड़ की छांव तले ही बच्चों की पढ़ाई होती है और गरीबों को खाना भी मिलता है। 

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