तालाब को हथियाने के लिए चली नई चाल, जानिए कौन खेल रहा है ये खेल

Bhopal, Madhya Pradesh, India
तालाब को हथियाने के लिए चली नई चाल, जानिए कौन खेल रहा है ये खेल

तालाब के दायरे से 50 मीटर बाद के क्षेत्र में गूगल मैप के जरिए अनुमति देने का इरादा

भोपाल. रिटेनिंग वॉल के जरिए जब नगर निगम के कुछ अधिकारी बड़े तालाब का दायरा समेटने में नाकाम रहे तो उन्होंने इसे समेटने की एक नई साजिश की है। यह तरीका है तालाब के दायरे से 50 मीटर बाद के क्षेत्र में गूगल मैप के जरिए अनुमति देने का। इससे पहले नगर निगम की कोशिश रिटेनिंग वॉल को ही फुल टैंक लेवल (एफटीएल) का आधार मानने की थी। लेकिन इस बार हुई बारिश ने तालाब का वास्तविक दायरा बताने के साथ यह भी बता दिया कि रिटेनिंग वॉल एफटीएल के अंदर बनाई गई है। यह मामला  एनजीटी में चल रहा है जिसमें नगर निगम अभी तक तालाब के वास्तविक दायरे की सीमांकन रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया है। निगम के मुताबिक सीमांकन कार्य अंतिम स्तर पर है। एनजीटी की रोक, निगम कैसे जारी कर सकता है अनुमति बिल्डिंग परमिशन जारी करने में आ रही दिक्कत और सुधारों पर विचार के लिए बीते गुरुवार ननि अपर आयुक्त, वीके चतुर्वेदी ने आर्किटेक्ट और इंजीनियरों की बैठक बुलाई। इस दौरान उन्होंने बड़े तालाब के किनारे बिल्डिंग परमिशन देने के लिए 50 मीटर की दूरी रिटेनिंग वॉल की बजाए गूगल मैप से नापने की बात कही। वहीं निगम द्वारा तालाब के आसपास निर्माणों की कंपाउंडिंग करने की तैयारी है।

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सवाल यह उठता है कि जब एनजीटी द्वारा एफटीएल से 300 मीटर किसी भी  निर्माण व अनुमति जारी करने पर रोक लगाई है तो निगम किस आधार पर गूगल मैप के जरिए अनुमति देने की तैयारी में है।  एक्सपट्र्स का कहना है कि जमीनों का लैंडयूज ही अभी तय नहीं है एेसे में अगर निगम  यहां कंपाउंडिंग करने की बात कर रहा है तो अवैध निर्माणों को वैध करने की तैयारी में है।

अब तक तय नहीं वैटलैंड के दायरे में वैध-अवैध निर्माण
भोज वैटलैंड के दायरे में कौन सी एक्टिविटी वैध हैं? क्या अवैध है? एनजीटी के आदेश के बाद भी स्टेट वैटलैंड अथॉरिटी यानी एनवायर्नमेंटल प्लानिंग एंड को-आर्डिनेशन आर्गेनाईजेशन (एप्को)   रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया है। शासन का कहना है कि बुधवार को होने वाली सुनवाई में यह रिपोर्ट पेश की जाएगी। दरअसल, इस रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि खानूगांव के पास नगर निगम को ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट की मंजूरी दी जाए या नहीं। स्टेट  वेटलैंड अथॉरिटी को वर्ष-2010 में ही यह तय कर लेना था कि वैटलैंड के दायरे में कौन सी एक्टिविटी वैध हैं? इसके आधार पर मप्र शासन को यहां चल रही  अवैध गतिविधयों को बंद कराना था।

इस मामले पर एनजीटी के काफी निर्देशों के बाद भी इसका निर्णय नहीं किया गया।

बड़े तालाब का सीमांकन कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। चूंकि यह   मास्टर प्लान का हिस्सा है लिहाजा यह रुल ऑफ लॉ के अंतर्गत आता है।  इसलिए यहां कम्पाउडिंग का सवाल ही नहीं उठता, अगर नगर निगम एेसा कुछ करने की प्लानिंग में है तो यह पूर्णत: कर रहा है तो गलत है। एनजीटी के आदेश के तहत यहां 300 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य व अनुमति जारी करने पर भी रोक है।
सचिन के वर्मा, एडवोकेट मप्र शासन, एनजीटी

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