ये है एशिया की दूसरी सबसे सुन्दर चर्च, 150 साल पहले बनी थी

Bhopal, Madhya Pradesh, India
 ये है एशिया की दूसरी सबसे सुन्दर चर्च, 150 साल पहले बनी थी

सीहोर में स्थिति यह चर्च करीब 150 साल पुराना है। पॉलेटिक एजेंट ओसबार्न ने चर्च का निर्माण 1860 में कराया गया था।

कुलदीप सारस्वत @ सीहोर। भारत की एतिहासिक धरोहरें अनमोल हैं। एक ऐसी ही एतिहासिक धरोहर पूरे एशिया में मशहूर है। एतिहासिक इमारत के रूप में ख्याति प्राप्त एशिया का सबसे सुंदर दूसरे नंबर का ऑल सेंट चर्च सीहोर में स्थित है। इस चर्च का इतिहास बताता है कि इसके निर्माण में 27 साल का समय लगा था। चचज़् का निर्माण पॉलेटिकल एजेंट जेडब्ल्यू ओसबार्न ने अपने भाई की याद में कराया था।



सीहोर में जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग के ऑफिस के सामने स्थित है। चर्च की करीब 52 एकड़ जमीन पर इस समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का कब्जा है। सीहोर में स्थिति यह चर्च करीब 150 साल पुराना है। पॉलेटिक एजेंट ओसबार्न ने चर्च का निर्माण 1860 में कराया गया था। पत्थरों से बने इस चर्च में शिल्प और आस्था का अद्भुत संगम दिखाई देता है। 



यह चर्च स्काटलैंड में बने चर्च को देखकर बनाया गया है। स्काटलैंड का चर्च और सीहोर में बना यह चर्च हूबहू एक जैसे हैं। शहर के प्रबुद्धजन बताते हैं कि ऑलेटिकल एजेंट जेडब्ल्यू ओसबार्न स्काटलैंड के दौरे पर गए थे, उन्होंने वहां पर सुंदर चर्च देखा। स्कॉटलैंड के लौटने के बाद उन्होंने सीहोर में सीवन नदी के किनारे एशिया के दूसरे नंबर के सबसे सुंदर चर्च की नींव रखी। इस चर्च का निर्माण कार्य पूर्ण होने में करीब 27 साल का समय लगा था। चर्च की सुदंरता को बनाने के लिए स्कॉटलैंड के चर्च की तरह इस चचज़् के आसपास भी बांस के झुरमुट लगाए गए थे।



हर समय रहती है रोशनी
ऑल सेंट चर्च के निर्माण के दौरान वास्तु शास्त्र का भी पूरा ध्यान रखा गया है। ऑल सेंट चर्च में सूर्याेदय से लेकर सर्यास्त तक रोशनी रहती है। रोशनी किस समय कहां होगी, इस बात का भी निर्माण के समय पूरा ध्यान रखा गया है। 


चर्च की जमीन पर खेल युवा कल्याण विभाग का कब्जा
चर्च मैदान की करीब 52 एकड़ जमीन बताते हैं। इस जमीन पर इस समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का कब्जा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग को चचज़् की जमीन पर कब्जा कलेक्टर न्यायालय से सरकारी प्रक्रिया का पालन कर दिया गया है। ईसाई समाज के कुछ लोग बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति कलेक्टर न्यायालय के आदेश को हाईकोटज़् में चुनौती दे तो यह जमीन चचज़् को बापस मिल सकती है।


चर्च के संरक्षण के लिए प्रशासन नहीं गंभीर
एतिहासिक इमारत ऑल सेंट चर्च के संरक्षण को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। यहां सिर्फ ईसाई समुदायक के लोग आते-जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से चर्च परिसर के मैन गेट पर ताला लगा रहता है। चर्च मैदान की सुंदरता बढ़ाने वाले बांस के झुरमुट भी धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने के कारण हर दस-बीस दिन में बांस के झुरमुट में आग लगती रहती है। गर्मी के सीजन में तो आए दिन आग लगती है।

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