#Patrikaforeducation -ऑटोमोबाइल सेक्टर में हैं शानदार ऑफर्स, जानें कैसे बनाएं करियर

Bhopal, Madhya Pradesh, India
#Patrikaforeducation -ऑटोमोबाइल सेक्टर में हैं शानदार ऑफर्स, जानें कैसे बनाएं करियर

इस सेक्टर में इंजीनियर्स की भारी डिमांड हर साल आ रही है। करियर के विकल्प के रूप में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी के क्षेत्र में व्यवसायियों के लिए निश्चित रूप से शानदार संभावनाएं हैं। 

भोपाल। परीक्षाएं खत्म होने के बाद अब ज्यादातर स्टूडेन्ट्स का फोकस इस बात पर है कि कौन सा कॉलेज उनकी आगे की पढ़ाई के लिए बेस्ट होगा। हालांकि इस बारे में स्टूडेन्ट्स पहले से ही अपनी तैयारियां रखते हैं, लेकिन कुछ फील्ड्स ऐसी हैं, जिनके बारे में जानना बेहद जरूरी है। ये बहुत ही कॉमन फील्ड्स हैं और इन सेक्टर्स में करियर को लेकर काफी सारे ऑप्शन भी होते हैं। 

आज हम आपको एक ऐसे ही सेक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें न सिर्फ एक बेहतर करियर है, बल्कि ये काफी क्रिएटिव और इनोवेटिव भी है। हम बात कर रहे हैं ऑटोमोबाइल सेक्टर की। भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से परिवर्तन हुए हैं। भारत में स्वदेशी और विदेशी, दोनों ऑटोमोबाइल कंपनियां, अब अपने प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी में बदलाव लाने पर फोकस कर रही हैं ताकि बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकें और बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ा सकें।

इसे देखते हुए इस सेक्टर में इंजीनियर्स की भारी डिमांड हर साल आ रही है। करियर के विकल्प के रूप में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी के क्षेत्र में व्यवसायियों के लिए निश्चित रूप से शानदार संभावनाएं हैं। 



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कई लोगों को लगता है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सिर्फ गाड़ियां ठीक करने का काम है, तो हम आपको बता दें कि सिर्फ गाड़ियों को ठीक करना ही ऑटोमोबाइल में नहीं आता है। ऑटोमोबाइल इंजीनियरींग वास्तव में इंजीनियरी की विभिन्न शाखाओं के तत्वों का सम्मिश्रण है, जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, सॉफ्ट और कम्प्यूटर साइंस। 

इस बारे में हमने बात की देश की प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कम्पनी के एक्सीक्यूटिव राहुल राय से। राहुल ने बताया कि इस इंडस्ट्री में काफी स्कोप है। ऑटोमोबाइल के डिजाइन, विनिर्माण, परीक्षण और रख-रखाव जैसे कार्यों को अंजाम देना होता है, इसमें वाहनों के निर्माण के लिए उपयुक्त कल-पुर्जों की डिजाइनिंग, उनका चयन और उनके इस्तेमाल की टेक्निक्स का निर्धारण किया जाता है।

विभिन्न स्तरों पर उत्पाद की जांच-परख की जाती है। सुरक्षा सुनिश्चित करने और तत्संबंधी स्थिति में सुधार लाने के लिए क्रैश परीक्षणों का भी आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त बेचे गए वाहनों के लिए मरम्मत सेवाएं प्रदान करना और बाजार की जरूरतों के मुताबिक वाहनों में निरंतर सुधार और उन्हें अद्यतन बनाने के प्रयास करना भी ऑटोमोबाइल इंजीनियर के कार्यों का हिस्सा है। 

इस तरह समझें, कहां कहां बन सकते हैं करियर
ऑटोमोबाइल उद्योग में रोजगार के अवसरों को तीन मुख्य क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है-डिजाइन, डेवेलपमेंट (विकास) और मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण)। डिजाइन के अंतर्गत वाहन या कम्पोनेन्ट का खाका तैयार किया जाता है। डेवलपमेंट इंजीनियर खाके का मूल्यांकन करते हैं और मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरों का संबंध वाहन के उत्पादन के साथ है। 


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ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को सौंपी जाने वाली कुछ भूमिकाओं में ऑटोमोबाइल डिजाइनर, प्रोडक्शन इंजीनियर, ड्राइवर इंस्टूमेंशन इंजीनियर, क्वालिटी इंजीनियर, ऑटोमोटिव तकनीशियन और पेन्टस स्पेशलिस्ट प्रमुख हैं। ऑटोमोबाइल विनिर्माण कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपोनेन्ट कंपनियों के अलावा सर्विस स्टेशनों और परिवहन कंपनियों द्वारा भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को काम पर रखा जाता है।

ऑटोमोबाइल सॉफ्टवेयर परियोजनाओं का संचालन करने वाली, आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां भी इन व्यवसायियों को रोजगार प्रदान करती हैं, परंतु इसके लिए उन्हें, सॉफ्टवेयर कोर्स करना होता है या सम्बद्ध कार्य का प्रशिक्षण लेना होता है। रोजगार का अन्य विकल्प मरम्मत वर्कशापों या गैराजों की स्थापना है। इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं अध्यापन के विकल्प भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में अनुसंधान की संभावना वाले क्षेत्रों में एरोडायनामिक्स, वैकल्पिक ईंधन, चैसिस, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, सामग्री, मोटर स्पोर्ट, पावर ट्रेन, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, वाहन और पैदल यात्री सुरक्षा या सप्लाई चेन मैनेजमेंट शामिल हैं। 

कौन कौन से कोर्स कर सकते हैं आप
ऑटोमोबाइल इंजीनियरींग में डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में बी.ई. या बी.टैक. कोर्स से शुरुआत कर सकते हैं अथवा मैकेनिकल इंजीनियरी में बी.ई या बी.टैक. कोर्स करके बाद में ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में एम.टैक. कर सकते हैं। 

ऑटोमोबाइल इंजिनियरी के अंतर्गत आने वाले कुछ विषयों में थरमोडायनामिक्स, एरोडायनामिक्स, इलेक्ट्रिकल मोशन, कंबस्चन इंजन, व्हीकल चैसीस, इलेक्ट्रिक सिस्टम्स, कंट्रोल सिस्टम्स, फ्लुइड मेकेनिक्स, एमिशन्स, वर्कशाप प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मशीन डिजाइन, कम्प्यूटर एडिड डिजाइन, प्रोटोटाइप क्रीएशंस और एर्गोनोमिक्स शामिल हैं।

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