'इंदु सरकार' के पक्ष में उतरी BJP, कहा - बायोपिक नहीं, फिर क्यों तिलमिला रही है कांग्रेस?

Bhopal, Madhya Pradesh, India
'इंदु सरकार' के पक्ष में उतरी BJP, कहा - बायोपिक नहीं, फिर क्यों तिलमिला रही है कांग्रेस?

मधुर भंडारकर की फिल्म "इंदु सरकार" को रिलीज ना होने देने को लेकर जिस प्रकार देशभर में कांग्रेस के नेता धमकी दे रहे हैं उससे कांग्रेस का असली चरित्र फिर एक बार उजागर हो गया है  - बीजेपी

भोपाल। मधुर भंडारकर की फिल्म इंदु सरकार को लेकर एक बार फिर से हंगामा होता नजर आ रहा है। इंदौर में कांग्रेस पार्टी के तमाम नेताओं की फिल्म पर आपत्ति के बाद उन्होंने फिल्म रिलीज न होने देने की धमकी दी थी, तो वहीं बीजेपी की ओर से अब फिल्म को लेकर ही कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।


इससे पहले कांग्रेस का कहना था कि निर्देशक मधुर भंडारकर और अभिनेता अनुपम खेर ने बीजेपी के कहने पर आपातकाल पर कांग्रेस की सर्वोच्च नेता स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एवं संजय गांधी जैसे पात्र लेकर इस फिल्म को बनाया है। वहीं अब बीजेपी ने इमरजेन्सी के समय देश के हालात और कांग्रेस के इमरजेन्सी को अनुशासन पर्व मनाने पर सीधा हमला बोला है। 


बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा है कि मधुर भंडारकर की फिल्म "इंदु सरकार" को रिलीज ना होने देने को लेकर जिस प्रकार देशभर में कांग्रेस के नेता धमकी दे रहे हैं उससे कांग्रेस का असली चरित्र फिर एक बार उजागर हो गया है । इंदौर में कांग्रेस नेताओं की खुलेआम धमकी भी उसी का एक उदाहरण है।




(रजनीश अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता, मप्र बीजेपी)


कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए बीजेपी का कहना है कि आखिर आपातकाल को अनुशासनपर्व मानने वाली कांग्रेस  फ़िल्म "इंदु सरकार" के रिलीज होने से क्यों तिलमिला रही है ? इस बारे में फिल्म के प्रोड्यूसर पहले की कह चुके हैं कि ये फिल्म बायोपिक नहीं है, बल्कि उन हालातों पर आधारित है, जो कि इमरजेन्सी के समय देश में चल रहे थे। ऐसे में कांग्रेस का ये प्रदर्शन और फिल्म का विरोध समझ के परे है। 


कांग्रेस पर तानाशाही प्रवृत्ति के होने का आरोप लगाते हुए बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस ने न सिर्फ देश पर आपातकाल थोपा है बल्कि वह नेहरू-गांधी परिवार के बारे में किसी भी प्रकार का कोई विश्लेषण ,साहित्य अथवा राजनीतिक विचार को स्वीकार ही नहीं कर पाती। अभिव्यक्ति की आजादी और सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता की दुहाई देने वाली कांग्रेस की कलई जनता के बीच में खुल चुकी है।


फिल्म इंदु सरकार आपातकाल की सच्चाई को उजागर करती है। असहिष्णुता, अभिव्यक्ति की आजादी का दमन, राजनीतिक विरोधियों पर अत्याचार, प्रताड़ना, प्रेस की आजादी पर हमला, सेंसरशिप से जैसे तमाम मुद्दों पर एक स्पष्ट और इतिहास की सच्चाई है आपातकाल।


इंदौर में शुरू हुआ था बवाल, विरोध में लिखा लेटर
ये सारा मामला सामने आया है कि फिल्म इंदु सरकार का ट्रेलर रिलीज होने के बाद। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद इंदौर में कांग्रेस के नेताओं की ओर से फिल्म का विरोध शुरू हुआ। कांग्रेसी नेताओं की ओर से फिल्म का विरोध किए जाने के बाद फिल्म को इंदौर में रिलीज नहीं किए जाने की धमकी भी दी गई थी।



'इंदु सरकार' फिल्म का पोस्टर

(फिल्म 'इंदु सरकार' के पोस्टर से)


इतना ही नहीं कांग्रेस की ओर से सिने सर्किट एसोसिएशन एवं सिनेमा गृह संचालकों को एक लेटर भी लिखा गया जिसमें बताया गया कि कांग्रेस को इंदिरा गांधी और संजय गांधी के किरदारों को लेकर आपत्ति है।


पार्टी द्वारा जारी किए गए इस लेटर में साफ कहा गया है कि अगर ये फिल्म इंदौर में रिलीज की गई तो सिनेमाघरों के बाहर आंदोलन भी किया जाएगा। कांग्रेस का कहना था कि फिल्म को बनाने के पीछे पार्टी और उसके पूर्व नेताओं को बदनाम करने के अलावा पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के मुताबिक इस फिल्म का वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी का गलत इस्तेमाल कर पार्टी के खिलाफ ये फिल्म बनाई गई है। 


झुकाव किसी राजनीतिक पार्टी की ओर नहीं - मधुर भंडारकर
हालांकि इससे पहले फिल्म के निर्माता मधुर भंडारकर पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका झुकाव किसी राजनीतिक पार्टी की तरफ नहीं है और 'इंदु सरकार' फ़िल्म कोई प्रौपेगैंडा फ़िल्म नहीं है। एक समाचार एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू ने हाल ही में मधुर भंडारकर ने कहा है कि उनके दोस्त कई अलग-अलग राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए है जिसमें शामिल हैं कांग्रेस, नेशनल कांग्रेस पार्टी, शिवसेना और कम्यूनिस्ट पार्टी। ऐसे में किसी भी एक पार्टी को लेकर उनका कोई एजेंडा नहीं है। 




मंधुर भंडारकर


(फिल्म का एजेंडा किसी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं - भंडारकर)


मधुर भंडारकर ने ये भी कहा कि उन्होंने कुछ भी मनगढ़ंत नहीं दिखाया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में सिर्फ वही तथ्य लिए गए हैं जो कि किताबों में लिखा गया है या दूरदर्शन की डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है। भंडारकर ने ये भी कहा कि फिल्म का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए हो सकता है कि तथ्यों को लोग अलग तरीके से देखें।

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