लकवा से बचना है तो ब्रेन हैमरेज के 6 घंटे के भीतर आएं एम्स!

Bhopal, Madhya Pradesh, India
लकवा से बचना है तो ब्रेन हैमरेज के 6 घंटे के भीतर आएं एम्स!

यदि मरीज अटैक के छह घंटे में एम्स पहुंचता है तो दिमाग में जमा खून का थक्का निकाला जा सकेगा और थक्के से होने वाले लकवे से आसानी से बचा जा सकता है।

भोपाल. ब्रेन हैमरेज अब जानलेवा नहीं, लकवा भी नहीं होगा। बस छह घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचना होगा। एम्स, भोपाल में अब ब्रेन हैमरेज मरीजों का कैथेडर से इलाज होगा। यदि मरीज अटैक के छह घंटे में एम्स पहुंचता है तो दिमाग में जमा खून का थक्का निकाला जा सकेगा और थक्के से होने वाले लकवे से आसानी से बचा जा सकता है। ये इलाज एक महीने के भीतर मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए जरूरी कैथ लैब के सभी उपकरण खरीदे जा चुके हैं। जल्द ही इन्हें इन्सटॉल कर लिया जाएगा।


स्विट्जरलैंड की टे्रनिंग आएगी काम
य ह इलाज एम्स में न्यूरोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नीरेन्द्र राय यह इलाज करेंगे। उन्होंने इसके लिए स्विटजरलैंड में छह माह की ट्रेनिंग भी ली है। डॉ. राय के अनुसार ब्रेन अटैक के मरीजों के लिए उसके बाद के छह घंटे काफी महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान यदि वे अस्पताल पहुंच जाते हैं तो उनमें लकवे के कारण होने वाली विकलांगता को रोका जा सकता है। अधिकांश मरीज गोल्डर ऑवर में अस्पताल नहीं पहुंच जाते इसलिए वे लकवे के शिकार हो जाते हैं।


क्या है कैथेडर तकनीक.
कैथेडर तकनीक सामान्य तौर पर हार्ट सर्जरी के लिए विकसित हुई। लेकिन अब न्यूरोलॉजिस्ट इसका ब्रेन अटैक के इलाज में भी उपयोग कर रहे हैं। कैथडर पतले धागे सा होता है। ब्रेन अटैक में माइक्रो कैथेडर का उपयोग होता है। इसे ब्लड सर्कुलेट करने वाली संबंधित धमनी या वैसेल्स में प्रवेश कराया जाता है। उसी में होकर इसे थक्के तक पहुंचाया जाता है। उससे थक्के को साफ कर दिया जाता है। इससे धमनी का रास्ता साफ हो जाता है और वह फिर से ब्रेन को सामान्य तरीके से खून पहुंचाना शुरू कर देती है। इससे लकवा नहीं हो पाता। यदि तुरंत लकवा हो गया हो तो वह भी कुछ समय बाद ठीक हो जाता है।

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