स्मार्ट सिटी के नाम पर यहां हुआ करोड़ों का पहला बड़ा घपला, ये अफसर नपेंगे

Brajendra Sarvariya

Publish: Mar, 20 2017 09:33:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
स्मार्ट सिटी के नाम पर यहां हुआ करोड़ों का पहला बड़ा घपला, ये अफसर नपेंगे

यहां की सड़कों पर इस लाइन को बिछाने के लिए की गई खुदाई और फिर रीफिलिंग स्पष्ट नजर आ रही है। क्षेत्र के पार्षद तक हैरान हैं कि एेसा क्यों किया गया। 

भोपाल। मध्यप्रदेश के छह शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद तेज हो गई है।  इसके साथ ही शुरू हो गया है घपले और घोटाले का खेल। स्मार्ट सिटी के नाम पर पहला बड़ा घपला भोपाल में सामने आया है। यहां एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत टीटी नगर के प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के दायरे से नगर निगम के इंजीनियर और अफसर खुद अंजान हैं। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ माह बाद जो क्षेत्र पूरी तक खाली होना है और जिसमें खुदाई होना है, वहां इन जिम्मेदारों ने पूरे 1.02 करोड़ रुपए खर्च कर पानी की नई लाइन बिछा दी।




रातों-रात निपटा दिया
यहां की सड़कों पर इस लाइन को बिछाने के लिए की गई खुदाई और फिर रीफिलिंग स्पष्ट नजर आ रही है। क्षेत्र के पार्षद तक हैरान हैं कि एेसा क्यों किया गया। रहवासियों के अनुसार आमतौर पर कई बार शिकायतें करने के बाद निगम का अमला काम करता है, लेकिन इस काम को रातों-रात निपटाया गया।




ये है पूरा मामला
जनवरी में ही यहां की गलियों में करीब 400 किमी लंबी लाइन बिछा दी गई। अब गृह विभाग की संपदा शाखा और स्मार्ट सिटी सेल मिलकर यहां के आवासों का निरीक्षण कर रहे हैं। यहां से परिवारों को शिफ्ट करने की कवायद की जा रही है। शिवाजी नगर को एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के लिए विकसित करना रद्द कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मई 2016 में टीटी नगर को स्मार्ट सिटी प्रस्तावित किया था। इसके बाद स्मार्ट सिटी कारपोरेशन ने इसका दायरा अपने हिसाब से तय किया। यह पूरी कवायद 2016 में हुई, लेकिन 2017 के शुरुआत में इसी क्षेत्र में पानी की लाइन बिछा दी गई। जलकार्य प्रभारी एआर पंवार के अनुसार जरूरत और लोगों की मांग के अनुसार ही प्रोजेक्ट तैयार किए जाते हैं। टीटी नगर के सरकारी आवासों में पाइपलाइन जर्जर होने की बात सामने आई थी। अब ये देखना होगा कि कौन सा क्षेत्र खाली होगा। 




पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका
रातों-रात खुदाई कर पाइनलाइन बिछाने में खर्च की गई एक  करोड़ रुपए की राशि गड़बड़ी की बड़ी आशंका उत्पन्न कर रहा है। बड़े प्रोजेक्ट की मंजूरी उच्चस्तर पर अफसरों द्वारा की जाती है। एेसे में यदि मामले की जांच की जाए तो कई नाम सामने आ सकते हैं। महापौर आलोक शर्मा इस पूरे मामले को दिखवाने की बात कह रहे हैं। 




इनका कहना है...
स्मार्ट सिटी के लिए जब खुदाई होना है तो फिर पाइपलाइन बिछाने की जरूरत क्या थी। कुछ माह बाद जब एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत निर्माण शुरू होगा तो पूरी लाइन खोदी जाएगी। यानि धन का दुरुपयोग हुआ है।
- अमित शर्मा, क्षेत्रीय पार्षद

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