गौर के इस सवाल ने बढ़ाई सरकार की चिंता, जानिए आखिर क्या पूछ बैठे 

Bhopal, Madhya Pradesh, India
गौर के इस सवाल ने बढ़ाई सरकार की चिंता, जानिए आखिर क्या पूछ बैठे 

मानसून सत्र में गौर अब सरकार से ये पूछने जा रहे हैं कि आखिर जब उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री रहते प्रोजेक्ट केंद्र से पास करवा दिया था तो फिर क्यों भोपाल और इंदौर में अब तक मेट्रो रेल सेवा शुरू नहीं हुई। 


भोपाल. सोमवार से शुरू हो रहे 10 दिवसीय मानसून में सरकार अपनी ही मेट्रो रेल से घिरेगी। मेट्रो प्रोजेक्ट में जरूरत से ज्यादा देरी और पैसे का इंतजाम नहीं होने की वजह पूर्व गृहमंत्री बाबूलाल गौर पूछेंगे। अपनी ही सरकार को मुश्किल में डालने वाले मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े तीखे सवाल लगाकर गौर ने एक बार फिर सत्ता व संगठन को तेवर दिखाए हैं। गौर की विधानसभा से दावेदारी करने वाले रोज नए बयान दे रहे हैं और संगठन भी गौर को बदलने की मंशा जता चुका है। इन सबके बीच गौर अब भी खुद की दावेदारी मजबूती के साथ पेश कर रहे हैं और सत्ता और संगठन को हर स्तर पर इसका अहसास भी करवा रहे हैं।  मानसून में गौर अब सरकार से ये पूछने जा रहे हैं कि आखिर जब उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री रहते प्रोजेक्ट केंद्र से पास करवा दिया था तो फिर क्यों भोपाल और इंदौर में अब तक मेट्रो रेल सेवा शुरू नहीं हुई। भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले फेज की लागत 6962.92 करोड़ रुपए है। पहले फेज में दो रूट पर 30 स्टेशन बनाने की योजना है।

अफसरों की जिद से देरी

सत्ता और संगठन की नाराजगी की परवाह किए बगैर गौर ने कहा,प्रोजेक्ट लेट होने की वजह पूछना अब जरूरी हो गया है। गौर ने कहा नगरीय प्रशासन मंत्री रहते उन्होंने भारत के मेट्रो मेन ई श्रीधरन के साथ मिलकर प्रस्ताव केंद्र से मंजूर कराया था। श्रीधरन इंडियन स्टाइल मेट्रो चलवाने के पक्ष में थे, लेकिन अफसर चाइना और जापान जैसी मेट्रो चलवाने की जिद पर अड़ गए। जापानी फायनेंसर जाइका के पीछे हटने पर अब अतरराष्ट्रीय बाजार में कोई निवेशक प्रोजेक्ट में हाथ डालने को तैयार नहीं है।

बाबूलाल गौर, पूर्व गृहमंत्री
क्या प्रोजेक्ट शुरू से ही विलंब से चल रहा था?
मेरे कार्यकाल में प्लानिंग बनकर तैयार हुई थी, बाद में कई परिवर्तन हुए, एेसे काम नहीं चलेगा।
अब प्रोजेक्ट का क्या भविष्य देखते हैं आप?
ये प्रोजेक्ट नगरीय प्रशासन से लेकर रेलवे को सौंप देना चाहिए।
क्या आपने इस बारे में सरकार को सुझाव दिए हैं?
बार-बार अफसरों के तबादलों से प्लानिंग पर असर पड़ता है। स्थायित्व का सुझाव पहले दिया था?

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