राशन की दुकानों पर भी नहीं गल रही सरकार की दाल

Bhopal, Madhya Pradesh, India
राशन की दुकानों पर भी नहीं गल रही सरकार की दाल

सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह लागत से सस्ती दाल बेच नहीं सकती और महंगी दाल कोई खरीदने को तैयार नहीं है।


भोपाल. प्याज की तरह तुअर दाल भी प्रदेश सरकार का पसीना निकाल रही है। दाल निकालने के लिए इसे राशन की दुकानों से बेचने का निर्णय दुकानदारों के कम कमीशन के कारण गले की हड्डी बना हुआ है। सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह लागत से सस्ती दाल बेच नहीं सकती और महंगी दाल कोई खरीदने को तैयार नहीं है। वह एक महीने में महज 84 मीट्रिक टन दाल बेच पाई है, जबकि केंद्र सरकार ने उसके हिस्से में 1674 मीट्रिक टन आवंटित की है।  


दरअसल, जब प्रदेश में तुअर दाल के दाम 200 रुपए प्रतिकिलो के पार हुए थे। तब प्रदेश सरकार ने केंद्र से दाल मांगी थी। लेकिन, जब तक मुहैया कराई गई, दाल के दाम नीचे आने शुरू हो चुके हैं। अब तो नई दाल बाजार में आने वाली है। लेकिन केंद्र ने प्रदेश के हिस्से में 1674 मीट्रिक टन दाल का कोटा तय कर दिया है। 


प्रदेश सरकार को यह बंदरगाह से उठाना है। केंद्र यह दाल प्रदेश को 66 रुपए प्रतिकिलो के भाव से दे रही है, जबकि प्रदेश सरकार को यह दाल 100 रुपए के भाव पर पड़ रही है। बावजूद सरकार ने सौ रुपए किलो के भाव पर बेचने का निर्णय लिया। अब इस तुअर दाल के आधा-आधा किलो के पैकेट राशन की दुकानों को दिए जा रहे हैं, जहां से ग्राहकों को इसकी बिक्री सुनिश्चित होगी, लेकिन संकट यह है कि राशन दुकान संचालक इस दाल को लेकर कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

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