MP आएंगे दलाई लामा, आकर्षक LADY को बनाना चाहते हैं अपना उत्तराधिकारी

Manish Gite

Publish: Mar, 17 2017 12:18:00 (IST)

Bhopal Ganj, Bhilwara, Rajasthan, India
MP आएंगे दलाई लामा, आकर्षक LADY को बनाना चाहते हैं अपना उत्तराधिकारी

तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा  19 मार्च को भोपाल आ रहे हैं, वे इससे पहले भी दो बार भोपाल आ चुके हैं...। मध्यप्रदेश में भी अनेक स्थानों पर उनके अनुयायी हैं। mp.patrika.com बताने जा रहा है उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से....।

तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा  19 मार्च को भोपाल आ रहे हैं, वे इससे पहले भी दो बार भोपाल आ चुके हैं...। मध्यप्रदेश में भी अनेक स्थानों पर उनके अनुयायी हैं। mp.patrika.com बताने जा रहा है उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से....।

भोपाल। तिब्बत की आजादी के लिए अहिंसक आंदोलन अब भी जारी है। दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो के इसी प्रयास की आज भी सराहना होती है। संघर्ष के बावजूद चीन और तिब्बत के बीच एक शांतिदूत की भूमिका निभाने के कारण उन्हें शांति का नोबल पुरस्कार मिला था।  दलाई लामा पहले दो बार भोपाल आ चुके हैं। इस बार 19 मार्च को भोपाल आ रहे हैं। वे इस दौरान नमामि देवी नर्मदे कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उनका देवास जिले के नेमावर में कार्यक्रम है। यहां आने से पहले वे नर्मदा सेवा यात्रा का समर्थन कर चुके हैं।


7 साल पहले जब भोपाल आए थे दलाई लामा
तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा 17 मार्च 2010 को भोपाल आए थे। उन्होंने विधानसभा में आयोजित मानव अधिकार पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रखे थे। उन्होंने विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम में अहिंसा और सद्भाव के साथ सभी को आगे बढ़ने का सदेश दिया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने उनका सम्मान किया था।

dalai lama in bhopal

(17 मार्च 2010 को दलाई लामा भोपाल आए थे  तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने उनका स्वागत किया था।)

सुंदर लेडी को बनाना चाहते हैं अपना उत्तराधिकारी
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में मदर्स-डे के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में दलाई लामा ने मन की बात कहकर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि वे अगले जन्म में महिला बनना चाहते हैं। उन्होंने लोगों को बताया था कि फ्रांस की यात्रा के दौरान एक महिला पत्रकार ने उनसे सवाल किया था कि क्या आने वाले समय में दलाई लामा एक महिला हो सकती हैं, तो उन्होंने तुरंत कहा था कि क्यों नहीं, जब हजारों महिलाएं बड़े-बड़े पदों की जिम्मेदारी संभालती हैं,तो लामा क्यों नहीं बन सकतीं। दलाई लामा ने यह भी कहा था कि उसका चेहरा बेहद आकर्षक होना चाहिए। अन्यथा उसकी कोई उपयोगिता नहीं होगी। उनके करीबी अनुयायी भी कहते हैं कि यह संकेत उनके अगले जन्म को लेकर है।


दलाई लामा चाहते हैं खत्म हो लामा प्रथा
82 वर्षीय दलाई लामा ने पिछले साल यह कहकर अपने अनुयायियों को झकझौर दिया कि दलाई लामा चुनने की 600 साल पुरानी परंपरा को खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके बाद अब किसी व्यक्ति को उनका उत्तराधिकारी नहीं चुना जाना चाहिए।


दलाई लामा ने एक विदेशी अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा था कि हमारे पास पांच सदी तक दलाई लामा रहे। चौदहवें दलाई लामा वे खुद हैं। इस परंपरा को उनके साथ ही खत्म कर देना चाहिए। उनका कहना था कि यदि अगर कमजोर व्यक्ति दलाई लामा चुना जाएगा तो तिब्बत की आध्यात्मिक संस्कृति धूमिल पड़ जाएगी।


60 बार मिली डॉक्टरेट की उपाधि
अहिंसा, शांति का संदेश, करूणामय के विचारों को दुनियाभर में फैलाने वाले दलाई लामा को 1959 से अब तक डॉक्टरेट की 60 मानद उपाधि, कई पुरस्कार, सैकड़ों सम्मान मिल चुके हैं। उनके व्यक्तित्व पर 50 से अधिक पुस्तकें लिखी गई हैं।


चीन के कब्जे में है तिब्बत
सन 1951 से तिब्बत पर चीन का कब्जा है। 1959 में आंदोलन के बाद से दलाई लामा हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित जीवन गुजार रहे हैं। उनका सचिवालय और सरकार यहीं के मैकलोडगंज से चलती है।


पोप के बाद सबसे लोकप्रिय हैं दलाई लामा
दलाई लामा को सम्मान और श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने पूरी दुनिया में दौरे करके अपने विचारों और शिक्षा को फैलाकर शांति का संदेश दिया। उनका संदेश प्यार, करूणा और क्षमाशीलता है।


लापता हैं पंचेन लामा
दलाई लामा ने ऐसा क्यों कहा इसके पीछे बड़ा कारण माना जाता है। क्योंकि तिब्बत में दलाई लामा की तरह पंचेन लामा भी चुने जाते है। पंचेन लामा दलाई लामा के बाद तिब्बत के सबसे बड़े धर्म गुरु होंगे। वर्तमान दलाई लामा ने गेधुन चोईकी नीमी नामक एक बच्चे को पुर्नजन्म के नियमों के अनुसार पंचेन लामा चुना था। परंतु चीनी सरकार ने 1995 में उसका अपहरण कर लिया। तब से वह लापता है।


58 सालों से हैं भारत के मेहमान
58 साल से भारत में निर्वासित जीवन जी रहे बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा स्वयं को भारत का ही पुत्र मानने लगे हैं। वे कहते हैं कि निर्वासित जीवन के दौरान अपने मकसद को पूरा नहीं कर पाए तो वे भारत में ही पुनर्जन्म लेने के इच्छुक हैं। दलाई लामा कहते हैं कि शारीरिक-मानसिक रूप से भारतीय ही हैं।

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