सीमा पर तैनात सिपाहियों की पत्नियों ने फोटो देखकर खोला करवा चौथ का व्रत

Bhopal, Madhya Pradesh, India
सीमा पर तैनात सिपाहियों की पत्नियों ने फोटो देखकर खोला करवा चौथ का व्रत

जब उसने ससुराल की दहलीज पर पहला कदम रखा था तो दिल में तमाम ख्वाहिशें थीं। सोचा था, पहले करवाचौथ पर वो चलनी की ओट से चांद देखेंगी, फिर जी भर कर अपने पति के चांद से चेहरे का दीदार करेंगे।

सतेन्द्र सिंह भदौरिया
भोपाल. जब उसने ससुराल की दहलीज पर पहला कदम रखा था तो दिल में तमाम ख्वाहिशें थीं। सोचा था, पहले करवाचौथ पर वो चलनी की ओट से चांद देखेंगी, फिर जी भर कर अपने पति के चांद से चेहरे का दीदार करेंगे। व्रत रखकर अपने फौजी पति की लम्बी उम्र की कामना करेंगे। वो पल कितना सुखद होगा। जब दो जिंदगियों के दरमियान विश्वास का रिश्ता आपसी मुहब्बत का एक नया आसमान तय करेगा। मगर उनकी ख्वाहिशों का चांद मुल्क की हिफाजत करते-करते कहीं छुप गया। सरहद पर पति शहीद हो गए और ख्वाहिशें अधूरी रह गईं। यह दास्तां है राजधानी के वीर शहीद रमेश कुमार और रामस्वरूप शर्मा की पत्नियों की।


व्रत से ज्यादा जरूरी था पति का फर्ज  
वार्ड-14 शांति कुंज कॉलोनी बैरसिया में रहने वाली लक्ष्मी बाई सेन का कहना है कि व्रत से ज्यादा जरूरी पति का फर्ज था। सोचा कि पोस्टिंग के दौरान साथ रहने का मौका मिलेगा, तो करवाचौथ मना लूंगी। लेकिन, सपना पूरा नहीं हो सका। मेरे पति शहीद स्व. सिगनल मैन रमेश कुमार की पोस्टिंग मथुरा हो गई। इससे पहले 3 जून 2013 को बारामुला जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश-तूफान के बीच रास्ते बंद हो गए। अफसरों के निर्देश मिले कि रास्ता साफ किया जाए।  इसी दौरान तूफान में वे शहीद हो गए।


ताजा हो जाती हैं पुरानी यादें
बैरक नंबर-10 सीटीओ थ्री ईएमई सेंटर बैरागढ़ में रहने वाली सविता शर्मा का कहना है कि वह पुराने जख्मों को जैसे-तैसे भूल पाई हैं। जब-जब करवाचौथ का व्रत आता है, तो पड़ोसियों को देख यादें ताजा हो जाती हैं। सविता के वीर शहीद पति स्व. रामस्वरूप शर्मा 22 जुलाई 1997 को नगालैंड में बम बिस्फोट के दौरान शहीद हो गए थे। जैसे-तैसे उन्होंने अपने बेटे सौरभ को पढ़ाया और खुद सेना में क्लर्क बन गई। अब बेटा पुणे में सेना के स्कूल में पढ़ रहा है। बेटे को सेना में भेजने की तमन्ना है।

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