एमपी गजब है... यहां पान के ठेलों और फुटपाथ पर बिकती है शराब

Bhopal, Madhya Pradesh, India
 एमपी गजब है... यहां पान के ठेलों और फुटपाथ पर बिकती है शराब

मध्यप्रदेश सरकार को शराब से सालाना 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा की आय होती है।

[email protected] चौधरी

मध्यप्रदेश सरकार एक ओर जहां धीरे-धीरे शराबबंदी की बात कर रही है। वहीं प्रदेश के ही कुछ जिलों में इन दिनों यह खुलेआम बिक रही हैं। कहने को तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शराब की दुकानें हाईवे से दूर कर दी गई हैं, लेकिन बाजारों में पान के ठेलों और फुटपाथ पर बिक रही शराब पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। यहां खुलेआम देसी-विदेशी शराब बेची जा रही है। 

वहीं इसे रोकने में न स्थानीय प्रशासन की रुचि है, न पुलिस और आबकारी विभाग इसपर ध्यान दे रहा है। हम बात कर रहे हैं बैतूल के चिचोली से चंद किलोमीटर दूर चंडीदेवी धाम की, जहां शराब की दुकानें तो छोडें पान के ठेलों और फुटपाथ पर तक शराब बेची जा रही है। इस संबंध में बात करने पर यहां शराब बेचने वालों ने बताया कि उन्हें चिचोली के शराब ठेकेदार ने भेजा है।




मप्र को हर साल सात हजार करोड़ टैक्स
मध्यप्रदेश सरकार को शराब से सालाना 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा की आय होती है। इस बड़ी रकम को देखते हुए सरकारों की रुचि उसे लगातार बढ़ाते रहने में रही है। 


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इसके अलावा सरकार का न तो शराब के मूल्य, गुणवत्ता या उसके सामाजिक-आर्थिक लाभ-हानि की तरफ कभी ध्यान रहा।अब जयंत मलैया कह रहे हैं कि सरकार 400 करोड़ रुपए शराब के खिलाफ जनमानस बनाने पर खर्च करेगी। साथ ही जनता जब चाहेगी शराबबंदी लागू कर दी जाएगी पर ऐसा करना आसान तो नहीं दिखता।

लागू होगी शराबबंदी!
बिहार की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी शराबबंदी की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन इस पर अमल होता नजर नहीं आ रहा है। आलम यह है कि मध्यप्रदेश में शराब की दुकानें दूध और चाय की दुकानों से पहले खुल रही हैं। यहां शराब चाय और दूध की अपेक्षा ज्यादा सुलभ है।

पिछले दिनों कई शहरों और कस्बों से शराब दुकानों के खिलाफ आंदोलन भी हुए। इन सब के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से शराबबंदी की घोषणा भी कर दी। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।

इसी प्रकार नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान यह बात जोर पकड़ रही थी। इस दौरान नर्मदा के दोनों तटों से शराब दुकानें दूर कर दी गईं, लेकिन अब जहां दुकानें हैं वहां रोज मेला लगता है। रोज झगड़े और मारपीट होती है। लोगों का कहना है कि इसका फायदा पुलिस उठा रही है। वहीं, कालाबाजारी भी चरम पर है। जिसके चलते पान के ठेलों और फुटपाथ पर शराब खुलेआम बिक रही है। 

इसलिए उठे सवाल
प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी की दोनों तटों पर पांच किलोमीटर तक शराब की सभी दुकानें बंद कर करवा दीं। दुकान वाले घबराए, शराबी चिंतित हुए कि अब ज्यादा चलना होगा, लेकिन मध्यप्रदेश टूरिज्म को कोई फर्क नहीं पड़ा। क्योंकि, नर्मदा के दोनों ओर बने प्रदेश सरकार के होटलों में चल रहे बार और दुकान इसमें नहीं माने गए। 

कैसे नहीं खुलेंगी नई दुकानें
सरकार ने कहा था कि प्रदेश में अब कोई नई शराब दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन पान के ठेलों और फुटपाथ पर शराब बेचने वालों ने उसे खुलेआम ठेंगा दिखा दिया। सूत्रों के अनुसार यह शराब आसपास के ठेकेदार ही बिकवा रहे हैं।



 उन्होंने इसके लिए अलग से आदमी भी रखे हैं। वहीं, आम बाजार बंद होने का समय रात साढ़े दस बजे का है, लेकिन शराब दुकान सात साढ़े ग्यारह बजे तक खोली जा रही हैं। 

शराब से मौत में देश में दूसरे नंबर पर है प्रदेश
देश में शराब पीने से सबसे अधिक मौतें महाराष्ट्र में होती हैं। इसके बाद दूसरा नंबर मध्यप्रदेश का है, जहां हर साल लाखों लोगों की मौत शराब पीने से होती है। इससे झगड़े,मारपीट,कत्ल और सड़क दुर्घटना भी हो रही हैं।
 
वहीं शराब की वजह से महिलाओं पर होने वाले शारीरिक शोषण के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। तमिलनाडु में शराब पीने वालों की मौतों के चलते अधिकतर महिलाएं 30 वर्ष से कम उम्र में ही विधवा हो रही हैं। वहीं, केरल में 69 प्रतिशत अपराधों की वजह शराब और ड्रग्स को बताया गया है। साल 2013 में महाराष्ट्र में शराब पीने से मरने वालों की संख्या 387 थी, जो साल 2014 में 339 प्रतिशत बढ़कर 1,699 हो गई।


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