विधानसभा में चर्चा विधायकों को मंजूर नहीं, पूरे समय होता रहा हंगामा

Bhopal, Madhya Pradesh, India
विधानसभा में चर्चा विधायकों को मंजूर नहीं, पूरे समय होता रहा हंगामा

यहां सार्थक बहस तो दूर सदन में मौजूद प्रतिनिधि हंगामा करते ही नजर आए, यहां तक कि महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित तो हुए लेकिन बिना चर्चा के ही।


भोपाल। अक्सर माना जाता है कि सदन में जनता के प्रतिनिधि, जनता के मुद्दों पर सार्थक बहस कर, जनता के लिए कुछ बड़े फैसले लेंगे, लेकिन मध्य प्रदेश में स्थिति बिल्कुल उलट नजर आती है। यहां सार्थक बहस तो दूर सदन में मौजूद प्रतिनिधि हंगामा करते ही नजर आए, यहां तक कि महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित तो हुए लेकिन बिना चर्चा के ही।

विधायक सदन में मौजूद रहे, सदन में विषयों पर सार्थक चर्चा हो, इसके लिए समय-समय पर प्रयास भी होते रहे हैं,  लेकिन प्रयास सफल होते नजर नहीं आए। पिछले एक साल में हुए सत्रों पर नजर डाली जाए तो कार्यसूची में शामिल विषय तो पूरे हुए लेकिन बैठकें हंगामा की भेंट चढ़ी। यहां तक कि महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो गए।

प्रतिदिन के हिसाब से देखें तो सदन के लिए 7 घंटे का समय निर्धारित होता है। इसमें एक घंटे लंच के लिए निर्धारित है। यानी बैठकों के लिए कुल छह घंटे निर्धारित है। जरूरत पडऩे पर स्पीकर सदन के समय को बढ़ा सकते हैं, लेकिन देखने में आया है कि सदन में प्रतिदिन छह घंटे चर्चा ही नहीं हो पाती।




दिसम्बर माह के सत्र की ही बात करें तो पांच दिवसीय सत्र मात्र 20 घंटे 21 मिनट ही चला। जबकि पांच दिन में 30 घंटे बैठकें होना थीं। लेकिन एेसा नहीं हो सका। कुछ इसी प्रकार की  स्थिति अन्य पिछले सत्रों की भी रही। सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक थे, लेकिन हंगामा के कारण चर्चा ही नहीं हो सकी। पिछले वर्ष के बजट सत्र की बात करें तो राज्य का बिना चर्चा ही पास हो गया क्योंकि बजट चर्चा के दौरान सदन में जमकर हंगामा हो रहा था। 

सर्वदलीय बैठक का प्रयोग
सदन में सार्थक चर्चा हो, इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले कुछ सत्रों में सर्वदलीय बैठक का सिलसिला शुरू किया। इसमें नेता प्रतिपक्ष सहित सभी विधायक दल के अध्यक्ष मौजूद रहते हैं। सहमति भी बनती है कि सदन चलाने में सहयोग करेंगे, लेकिन सदन में एेसा कम ही नजर आता है। 




- सदन में विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो,  चर्चा में भाग लें। इसके लिए प्रयास होता है। सर्वदलीय बैठक भी इसी की कड़ी है। इसका असर दिख रहा है। कई मौकों पर सदस्य हंगामा अधिक करते हैं। इसके बजाय चर्चा में भाग लें तो बेहतर परिणाम आएंगे।
डॉ. सीतासरन शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष

पिछले एक साल की बैठकों का ब्योरा
शीतकालीन सत्र
शीतकालीन सत्र - 5 से 9 दिसम्बर 2016
सत्र की निर्धारित अवधि - 5 दिन 
निर्धारित बैठकों की संख्या - 5 दिन 
बैठकों का कुल समय - 20 घंटे 21 मिनट 


मानसून सत्र
मानसून सत्र - 18 जुलाई से 24 अगस्त 2016
सत्र की निर्धारित अवधि - 38 दिन
निर्धारित बैठकों की संख्या - 11 दिन
बैठकें हुई - 10 दिन
बैठकों का कुल समय - 35 घंटे 32 मिनट 


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बजट सत्र
बजट सत्र - 23 फरवरी से 1 अप्रेल 2016
सत्र की निर्धारित अवधि - 39 दिन 
निर्धारित बैठकों की संख्या - 23 दिन
बैठकें हुईं - 22 दिन
बैठकों का कुल समय - 125 घंटे 20 मिनट

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