MP का रहस्यमयी किला, जहां जिन्न के कब्जे में है पारस पत्थर!

Bhopal, Madhya Pradesh, India
MP का रहस्यमयी किला, जहां जिन्न के कब्जे में है पारस पत्थर!

राजधानी भोपाल से करीब 50 किलोमीटर दूर पर एक पहाड़ी पर बने इस किले में पारस पत्थर पाने के लिए हो चुके हैं कई युद्ध।


भोपाल। कई बार आपने भी पारस पत्थर के बारे में सुना ही होगा। कहा जाता है कि यह एक ऐसा पत्थर होता है जो हर लोहे की वस्तु को सोने में बदल देता है। ऐसे ही एक पत्थर मध्यप्रदेश के एक किले में होना भी माना जाता है। 

वहीं यह भी किंदवंती है कि इस पत्थर की रक्षा किले में रहने वाले जिन्न द्वारा ​की जाती है। यहां हम आपको बता रहे हैं प्रदेश के एक ऐसे किले के बारे में जिसे आज भी रहस्यमयी माना जाता है। 


जी हां मध्यप्रदेश में स्थित यह किला राजधानी भोपाल से करीब 50 किलोमीटर दूर पर एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। कहते हैं कि इसी किले के अंदर पारस पत्‍थर भी मौजूद है। मान्यता है कि यहां के राजा के पास पारस पत्थर था, जिसे किसी भी चीज को छुलाभर देने से वह सोना हो जाती थी।

1200 ईस्वी में निर्मित यह किला रायसेन का किला के नाम से जाना जाता है,जो मध्य प्रदेश का एक प्रमुख आकर्षण है। पहाड़ी की चोटी पर इस किले के निर्माण के बाद रायसेन को इसकी पहचान बलुआ पत्थर से बना हुआ यह किला प्राचीन वास्तुकला एवं गुणवत्ता का एक अद्भुत प्रमाण है जो इतनी शताब्दियां बीत जाने पर भी शान से खड़ा हुआ है।



इसकी दूसरी खासियत ये है कि इस किले में सबसे पुराना वॉटर हार्वेस्‍टिंग सिस्‍टम लगा हुआ है। इस किले पर शेरशाह सूरी ने भी शासन किया था। इस किले को लेकर ऐसा माना जाता है कि इस किले के राजा के पास एक पारस का पत्‍थर था। उस पारस के पत्‍थर को लेने के लिए यहां पर कई युद्ध हुए। 

ऐसा ही एक युद्ध राजा रायसेन ने भी लड़ा, लेकिन वो उस युद्ध में हार गए। ऐसे में वो पत्‍थर किसी और के हाथ में न चला जाए, इसलिए उन्‍होंने उसको किले के अंदर ही तालाब में फेंक दिया। आखिर में युद्ध के दौरान ही राजा की मौत भी हो गई। मरने से पहले उन्‍होंने पारस पत्‍थर के बारे में किसी को नहीं बताया।



उनकी मौत के बाद से ये किला वीरान हो गया। इसके बावजूद उस पारस पत्‍थर को ढूंढने उस किले में बहुत से लोग गए। ऐसा भी कहा जाता है कि जो भी किले में पत्‍थर को ढूंढने जाता, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता। 

इसके पीछे जो कारण बताया जाता है उसके मुताबिक चुंकि पारस पत्‍थर की रखवाली जिन्‍न करते हैं। इस कारण उसको ढूंढने के लिए जाने वाला हर इंसान अपना मानसिक संतुलन खो देता है। पत्‍थर की तलाश में किले में कई बार रात में गुनियां की मदद से खुदाई होती है। दिन में जो लोग यहां घूमने आते हैं उन्हें कई जगह तंत्र क्रिया और खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढ़े दिखाई देते हैं।


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