डिफरेंट बनाना है करियर तो देखें कहां हैं मौके

Deepesh Tiwari

Publish: Jun, 20 2017 01:07:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
डिफरेंट बनाना है करियर तो देखें कहां हैं मौके

 बिजनेस जर्नलिज्म एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन इंटरनेशनल मार्केटिंग, ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कोर्सेज देश-विदेश में चल रही बिजनेस गतिविधियों और उसमें आने वाले नए परिवर्तनों से रू-ब-रू कराते हैं।

भोपाल। 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद अब स्टूडेंट नए करियर ऑप्शन की तलाश में हैं। अब वह ट्रेंड चेंज हो रहा है जब स्टूडेंट केवल इंजीनियर, डॉक्टर, सीए या सरकारी नौकरी की चाह रखते थे। समय के साथ कई नए ऑप्शन सामने आ रहे हैं, जिसमें स्टूडेंट बेहतर कमाई कर सकते हैं। इन दिनों यूथ ऐसे कोर्स में एडमिशन ले रहे हैं जहां कमाई के साथ-साथ काम करने की आजादी हो। करियर काउंसलर नीता भारद्वाज बतातीं हैं कि इन कोर्स में एडमिशन लेकर स्टूडेंट पैसे के साथ नाम भी कमा सकते हैं। आइए जानें किस फील्ड में कितने ऑप्शन हैं-

बिजनेस कोर्सेज में डिप्लोमा
बिजनेस जर्नलिज्म एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन इंटरनेशनल मार्केटिंग, ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कोर्सेज देश-विदेश में चल रही बिजनेस गतिविधियों और उसमें आने वाले नए परिवर्तनों से 
रू-ब-रू कराते हैं। छात्र चाहें तो बिजनेस में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं या फिर बिजनेस जर्नलिज्म में करियर तलाश सकते हैं। एन्टरप्रिन्योरशिप, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट, बिजनेस पॉलिसी आदि बनाने से जुड़े कई अहम काम इसके अंतर्गत आते हैं। इन कोर्सेज में भारत में बिजनेस का माहौल, देश की वित्तीय व्यवस्था, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, साइबर जर्नलिज्म, पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, एडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग, वैश्विक सूचनातंत्र जैसे विषयों की जानकारी दी जाती है। 

विदेशी भाषाओं का बढ़ता दायरा
देश के विभिन्न विवि में पंजाबी, संस्कृत जैसी लोकभाषाओं में डिप्लोमा किया जा सकता है। विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा के ढेर सारे विकल्प उपलब्ध हैं। क्रोएशियाई, फ्रेंच, हंगेरियन, अरबी, पोलिश, सर्बियाई, स्पेनिश, चेक, बुल्गारियाई, पर्शियाई, इतालवी, रूसी, जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में कंपनियां विदेशों में व्यवसाय बढ़ा रही हैं। 

काउंसलिंग एंड गाइडेंस 
कई बार जीवन की मुश्किलें इतनी बढ़ जाती हैं कि इन्हें सुलझाने के लिए सलाहकार की जरूरत पड़ती है। पारिवारिक समस्या, घरेलू हिंसा, डिप्रेशन, ड्रग्स की लत, तनाव जैसी परेशानियां दूर करने में सलाहकार अहम भूमिका निभाते हैं। काउंसलिंग एंड गाइडेंस में डिप्लोमा करने के बाद आप मैरिज काउंसलिंग एजेंसियों, वृद्धाश्रम, जनकल्याण विभाग, काउंसलिंग सेंटर, स्कूल, कॉलेज आदि में संभावनाएं तलाश सकते हैं या फिर स्वतंत्र रूप से अपना काम भी शुरू कर सकते हैं।

ट्रेवल एंड टूरिज्म
पर्यटन के बढ़ते बाजार को देखते हुए इस क्षेत्र में रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। यह कोर्स करने के बाद हॉलीडे रिप्रजेंटेटिव, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर मैनेजर, टूर मैनेजर,ट्रेवल एजेंसी मैनेजर, कस्टमर सर्विस मैनेजर,  टूरिज्म ऑफिसर, ईवेंट ऑर्गनाइजर की जॉब पा सकते हैं। इस कोर्स में टूरिज्म इंडस्ट्री और इसकी परिधि में आने वाले विषयों जैसे टूर ऑपरेटर्स, एयरलाइन्स, होटल, टूरिस्ट बोड्र्स आदि की जानकारी दी जाती है। ट्रैवल एंड टूरिज्म का कोर्स करने के बाद होटल मैनेजमैंट का स्पेशलाइज्ड कोर्स भी किया जा सकता है। 

क्वालिटी कंट्रोल एंड फूड सेफ्टी  साइंस
यह कोर्स करके फूड टेक्नोलॉजी साइंटिस्ट या फिर फूड सेफ्टी एंड क्वालिटी मैनेजर की जॉब की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। तकरीबन सभी बड़े होटलों में फूड एंड क्वालिटी मैनेजरों की भर्ती की जाती है।

वीमेंस डेवलपमेंट स्टडीज 
सरकारी जनकल्याण विभाग, मानवाधिकार आयोग, गैर-सरकारी संगठन, लोक प्रशासन, स्वास्थ्य सेवा, वर्कप्लेस कंडीशन, पर्सनल रिलेशन्स, पब्लिक रिलेशन्स आदि के क्षेत्र में आप जा सकते हैं। इसके अलावा आप पॉलिसी एनालिस्ट या कंसल्टेंट बन सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं या फिर टीचिंग के क्षेत्र में जा सकते हैं। साइकोलॉजी या सोशल वर्क में डिग्री हासिल करने वाले छात्र इस कोर्स को करके सरकारी संस्थाओं, जनकल्याण विभाग, स्कूल, कॉलेज आदि में थेरेपिस्ट का काम कर सकते हैं।

हेल्थ एंड सोशल जीरन्टोलॉजी
हेल्थ एंड सोशल जीरन्टोलॉजी में कोर्स करने के बाद रिसर्च वर्क किया जा सकता है। हमारे देश की तुलना में पश्चिमी देशों में बुजुर्गों की देखभाल की बेहतर व्यवस्था है। इसके मद्देनजर समाज शास्त्र, मनोविज्ञान जैसे विषयों में डिग्री हासिल कर चुके छात्र यह कोर्स करने पर विदेशों में भी रोजगार तलाश सकते हैं।

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