कम नहीं हो रहीं पुलिस और जनता के बीच की दूरियां, डीजीपी परेशान

Bhopal, Madhya Pradesh, India
कम नहीं हो रहीं पुलिस और जनता के बीच की दूरियां, डीजीपी परेशान

पूर्व डीजीपी एसके राउत कहते हैं, 'पुलिस की अच्छाइयां, और तकलीफें लोगों तक नहीं पहुंच पातीं। जबकि बुराई ज्यादा सामने आती हैं। नतीजतन पुलिस को वो सम्मान नहीं मिलता जो आर्मी के जवानों को हासिल है।

ब्रजेश चौकसे@ भोपाल. मप्र पुलिस, पब्लिक से नजदीकियां बढ़ाने के लाख जतन कर रही है। इसके लिए ग्राम रक्षा समितियों से लेकर घर-घर दस्तक देने का अभियान चलाया गया, बावजूद 50 फीसदी आबादी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। सोशल मीडिया पर अवतरित होने के बाद भी पुलिस को रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा। पूर्व डीजीपी एसके राउत कहते हैं, 'पुलिस की अच्छाइयां, और तकलीफें लोगों तक नहीं पहुंच पातीं। जबकि बुराई ज्यादा सामने आती हैं। नतीजतन पुलिस को वो सम्मान नहीं मिलता जो आर्मी के जवानों को हासिल है।


 हाल यह है कि बड़े शहरों भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर की 50 प्रतिशत आबादी से पुलिस का संपर्क नहीं है। गांवों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत है। जबकि पुलिस और पब्लिक के बीच दूरियां मिटाने के लिए ग्राम रक्षा समिति और नगर सुरक्षा समितियां बनी हुई हैं। राउत कहते हैं कि जनता से संपर्क के लिए बीट प्रभारी से लेकर सिपाही तक को घर-घर संपर्क करने और उन्हें अपना मोबाइल एवं थाने का फोन नंबर नोट कराने के निर्देश दिए गए थे। चौपाल, जनसुनवाई भी हुई, लेकिन नतीजे बेहतर नहीं आए।

बल कम है, इसलिए तैनाती नहीं
प्रदेश पुलिस पहले ही बल की कमी से जूझ रही है। शहर में सैकड़ों की संख्या में पुलिस सहायता केंद्र बना दिए गए। मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों पर बने इन सहायता केंद्रों में किसी की तैनाती नहीं की गई है। इस कारण यह अधिकांश समय खाली रहते हैं। इतना ही नहीं बीट का क्षेत्र भी बड़ा होने के कारण पुलिसकर्मी हर घर तक नहीं पहुंच पाते। कई बार तो हालत यह होती है कि बीट प्रभारी एक गली में कई-कई दिन तक नहीं पहुंचते। दूसरी वजह बीट के साथ कई अन्य जिम्मेदारियां जैसे कानून व्यवस्था में ड्यूटी, तीज-त्योहार, वीआईपी कार्यक्रम और अपराधियों की तलाश से लेकर समन-वारंट की तामील कराने में लगा रहना भी है।


निर्देश हुए हवा
पीएचक्यू ने कई बार किराएदारों के सर्वे से लेकर घर-घर तक दस्तक देने के निर्देश दिए, लेकिन हर बार उनका अमल कागजों पर ही हुआ। भोपाल में ही पुलिस इन निर्देशों का पालन नहीं कर सकी। वह सिर्फ मोहल्ला समिति, नगर सुरक्षा समिति और स्थानीय नेताओं केभरोसे ही पुलिसिंग पर जोर देती रही। यही वजह है कि उस तक सही सूचनाएं नहीं पहुंच पाती हैं। पुलिस-पब्लिक की नजदीकी नहीं बढऩे से अपराधों का ग्राफ भी बढ़ा है, अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ती है।

दूरियों की मुख्य वजह
0 इस कहावत पर यकीन होना कि न पुलिस से दोस्ती अच्छी, न दुश्मनी।
0 पुलिस का व्यवहार ठीक न होना। बोल-चाल में गालियों का उपयोग।
0 मदद करने पर थाने और कोर्ट के चक्कर लगाने का डर।
0 पुलिस से नजदीकियां होने पर छवि खराब होने की चिंता।

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