छींकते समय इसलिए बंद हो जाती हैं आंखें, ब्रेन देता है मैसेज

Alka Jaiswal

Publish: Feb, 14 2017 05:10:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
छींकते समय इसलिए बंद हो जाती हैं आंखें, ब्रेन देता है मैसेज

हम कितनी भी आंखें खुली रखने की कोशिश करें लेकिन छींकते वक्त आंखे खुली रख पाना संभव नहीं हो पाता है। यह एक नेचुरल प्रोसेस होता है जो कि हमारी बॉडी के कंट्रोल में नहीं होता है।


भोपाल। अकसर हमने देखा होगा कि जब भी हम छींकते हैं, उस वक्त हमारी आंखे बंद हो जाती हैं। हम कितनी भी आंखें खुली रखने की कोशिश करें लेकिन छींकते वक्त आंखे खुली रख पाना संभव नहीं हो पाता है। यह एक नेचुरल प्रोसेस होता है जो कि हमारी बॉडी के कंट्रोल में नहीं होता है।

भोपाल के डॉ. राकेश भार्गव बताते हैं कि सांस लेते वक्त जब भी हमारी नली में कोई धूल का कण या फिर महीन रेशा फंस जाता है, तो हमारे शरीर द्वारा उसे बाहर निकालने के लिए छींकने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसा करते वक्त हमारी पलकें खुद ही झपक जाती हैं जिसके लिए ट्राईजेमिनल नर्व जिम्मेदार होती है। ये नर्व हमारी आंखों के साथ-साथ हमारे चेहरे, मुंह, नाक और जबड़े को कन्ट्रोल करती है।


इसके अलावा इसके लिए क्रेनियल नर्व्स भी जिम्मेदार होती हैं। यह वह नर्व्स होती हैं जो कि आंख और नाक से जुड़ी होती हैं। जैसे ही हमें छींक आती है, हमारे लंग्स हवा को तेज़ी से बाहर की तरफ फेंकते हैं और इसी समय हमारा दिमाग पलकों की नर्व्स खींचने का मैसेज देता है और हमारी आंखें बंद हो जाती हैं।

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