MP के प्रमोशन में आरक्षण मामले पर ये क्या बोल गए जेठमलानी

Manish Gite

Publish: Feb, 17 2017 05:19:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
MP के प्रमोशन में आरक्षण मामले पर ये क्या बोल गए जेठमलानी

मध्यप्रदेश में चल रही प्रमोशन में आरक्षण की लड़ाई पर देश के जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी ने बातचीत से हल निकालने की बात कहकर सभी को चौंका दिया है। जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में सपाक्स की ओर से केस लड़ रहे हैं।


भोपाल। मध्यप्रदेश में चल रही प्रमोशन में आरक्षण की लड़ाई पर देश के जाने-माने अधिवक्ता राम जेठमलानी ने बातचीत से हल निकालने की बात कहकर सभी को चौंका दिया है। जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में सपाक्स की ओर से केस लड़ रहे हैं।

अधिवक्ता राम जेठमलानी शुक्रवार को लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित मूट कोर्ट में शामिल होने आए थे। इससे पहले वे एक होटल में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने मध्यप्रदेश की सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा भी छेड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का हल बातचीत से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भले ही सपाक्स के फेवर में फैसला हो जाए, लेकिन इसका स्थायी हल बैठकर चर्चा करने के बाद ही निकलेगा। सपाक्स के वकील रामजेठमलानी के इस वक्त को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब तीन दिनों बाद 21 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में इसी मुद्दे पर सुनवाई होना है।

मध्यप्रदेश में हो रहा है फैसले का इंतजार
प्रमोशन में आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तारीखें बढ़ने के बाद प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों का इंतजार बढ़ते जा रहा है। पिछले सुनवाई 14 फरवरी को थी। अब सुनवाई 21 फरवरी को तय कर दी गई है। 

यह है मामला
मध्यप्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) अधिनियम 2002 को खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट ने दिए थे प्रमोशन छीनने के आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 2002 में सरकार द्वारा बनाए गए नियम को रद्द कर 2002 से 2016 तक जिन्हें नए नियम के अनुसार पदोन्नति दी गई है उन्हें रिवर्ट करने के आदेश दिए थे। मप्र सरकार ने इसी निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन (LIP) लगा रखी है।

फैसले के इंतजार में बंटने लगे अधिकारी-कर्मचारी
प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर प्रदेश के सरकारी विभागों में काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी जातियों में बंटने लगे हैं। वे एक साथ ही एक ही छत के नीचे भले ही काम कर रहे हों, पर उनके मन में भेदभाव बढ़ा है। वे जाति आधार को भुलाकर बात तो नहीं करते, पर अपनों के बीच इस मामले में खुलकर बात होती है।

चुनाव तक मामला खींचने की तैयारी
प्रमोशन में आरक्षण मामले में मुख्यमंत्री का एक बार सार्वजनिक तौर पर बयान आया, लेकिन इसके बाद मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। सरकार भी अब कोई विवाद नहीं चाहती। राजनीतिक दल भी सधी हुई प्रतिक्रिया देते हैं। मामला वोट बैंक से जुड़ा होने से सरकार चुनाव तक ये मामला खींचना चाहती है। कोर्ट में लगातार सुनवाई टल रही है।


up में हो चुके हैं कई डिमोशन
इससे पहले उत्तरप्रदेश में भी कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण को रद्द कर दिया था। इसके बाद डिमोशन का सिलसिला शुरू हो गया था। इससे उत्तरप्रदेश ने बड़ी संख्या में धिकारी-कर्मचारियों को बड़े पदों से वापस छोटे पदों पर डिमोट कर दिया था।


सक्रिय हैं प्रदेश के कर्मचारी
प्रमोशन में आरक्षण पर एक तरफ अजाक्स सक्रिय है, वहीं सपाक्स पर भी लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। हाल ही में उसने प्रदर्शन कर सरकार की भेदभावपूर्ण नीति की निंदा की। सपाक्स के डा. शैलेंद्र व्यास ने कहा कि सरकार और अजाक्स की रणनीति जानबूछकर प्रकरण को उलझाने की है, इसके चलते कई कर्मचारी बगैर पदोन्नति ही रिटायर हो रहे हैं। संघ के लक्ष्मीनारायण शर्मा ने का कहना है कि सरकार को सामान्य और अजाक्स वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भेदभाव छोड़ना चाहिए।

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