देखें भोपाल के शिवमंदिरों में कैसे हुआ भोले का श्रृंगार

pankaj shrivastava

Publish: Jul, 18 2017 08:28:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
 देखें भोपाल के शिवमंदिरों में कैसे हुआ भोले का श्रृंगार

शहर के झरनेश्वर मंदिर बारह दफ्तर, पिपलेश्वर मंदिर नेहरू नगर, सिद्धेश्वर मंदिर नेहरू नगर, गुप्तेश्वर मंदिर, अखिलेश्वर महादेव मंदिर, शिव भवानी मंदिर हबीबगंज, बाल शिव मंदिर सीटीओ, मनुआभान की टेकरी स्थित शिव मंदिर, शिव मंदिर साकेत नगर सहित शहर के सभी मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक, शृंगार किया।

भोपाल। सावन मास में शिवलयों की छटा देखते ही बन रही है। लोग सोमवार के अलावा बाकी दिनों में भी भारी संख्या में भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। भोपाल के शिव मंदिरों में परंपरानुसार हर रोज भगवान शिव का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। खास बात यह है कि हर रोज नए तरह का श्रृंगार करने में मंदिर के पुजारियों को 3 से 4 घंटे का समय लगता है।


शहर के झरनेश्वर मंदिर बारह दफ्तर, पिपलेश्वर मंदिर नेहरू नगर, सिद्धेश्वर मंदिर नेहरू नगर, गुप्तेश्वर मंदिर, अखिलेश्वर महादेव मंदिर, शिव भवानी मंदिर हबीबगंज, बाल शिव मंदिर सीटीओ, मनुआभान की टेकरी स्थित शिव मंदिर, शिव मंदिर साकेत नगर सहित शहर के सभी मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक, शृंगार किया जा रहा है। आज हम आपको इन्हीं मंदिरों में भगवान शिव के रूप का दर्शन करवा रहे हैं।


अलौकिक शृंगार के हुए दर्शन
सावन के दूसरे सोमवार को मंदिर के गर्भगृह में भगवान मनकामेश्वर जलमग्न थे, और बाहर खड़े होकर श्रद्धालु उनके दर्शन कर रहे थे। सावन सोमवार के मौके पर प्राचीन नेवरी स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भगवान का जल से विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान पूरे गर्भगृह में ढाई टैंकर यानी लगभग 22 हजार 500 लीटर पानी भरा गया। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन करने का सिलसिला देर रात्रि से शुरू हुआ जो सुबह 6 बजे तक जारी रहेगा।  भगवान की प्रतिमा के डेढ़ फीट ऊपर तक गर्भगृह में पानी भरा हुआ था। रात्रि में यहां शृंगार दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ जो मध्यरात्रि के बाद तक जारी रहा। मंगलवार को सुबह गर्भगृह से जल निकालकर इसे पेड़ों में डाला जाएगा। यहा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। 

Shiv Mandir

गुफा मंदिर में मेला
गुफा मंदिर में मंदिर में रुई, पुदीना, बेलपत्र से भगवान का विशेष शृंगार किया गया था, अलसुबह से ही यहां  दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था। इस मौके पर पंडितों द्वारा रुद्री पाठ, शिव महिमन पाठ किया गया। दर्शन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। इसी तरह बिड़ला मंदिर में भी सावन का मेला लगा रहा। यहां शाम को दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रही। 

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फूलों के बंगले में विराजे गोपीश्वर 
कायस्थपुरा स्थित बड़वाले महादेव मंदिर में मथुरा की तर्ज पर गोपीश्वर स्वरूप में भगवान भोलेनाथ का शृंगार किया गया। यहां रात्रि में मोगरा, गुलाब, गेंदा आदि फूलों से बंगला सजाया। इसके लिए मथुरा से मोगरा मंगाया गया है, जबकि 100 किलो फूल और गेंदा से बंगला सजाया। मान्यता है कि श्रीकृष्ण की रासलीला देखने  भोलेनाथ गोपी के स्वरूप में पहुंचे थे।

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