पन्नी बीनकर करती हैं गुजारा, फुटपाथ पर सोती हैं, फिर भी बन गयीं नेशनल प्लेयर

Bhopal, Madhya Pradesh, India
पन्नी बीनकर करती हैं गुजारा, फुटपाथ पर सोती हैं, फिर भी बन गयीं नेशनल प्लेयर

ये चारो नेशनल हॉकी प्लेयर गौतम नगर फुटपाथ और वहां के रेलवे के किनारे बनी झुग्गियों में रहती हैं। इनकी जिंदगी बहुत ही संघर्षपूर्ण रही है।

भोपाल। दिल्ली में आयोजित हुए 62वीं राष्ट्रीय शालेय फ्लोर हॉकी टूर्नामेंट में एमपी का प्रतिनिधित्व करने वाली दिव्या पंथी, सिमरन, माला उइके और शीतल उइके को आपने खेलते हुए तो देखा होगा लेकिन इनकी इस दिनचर्या के बारे में आप नहीं जानते होंगे। आपको बता दें कि ये चारो नेशनल हॉकी प्लेयर गौतम नगर फुटपाथ और वहां के रेलवे के किनारे बनी झुग्गियों में रहती हैं। इनकी जिंदगी बहुत ही संघर्षपूर्ण रही है।

मां-बाप बीनते हैं पन्नियां
इन चारों खिलाड़ियों के मां-बाप पूरे दिन पन्नियां बीनते हैं और उस दौरान ये खिलाड़ी अपने छोटे भाई-बहनों का ख्याल रखती हैं। जब शाम के चार बज जाते हैं तो यह अपनी रोज़ाना की प्रैक्टिस करने के लिए घर से निकल जाती हैं। भले ही टीम दिल्ली में खास प्रदर्शन ना कर पाई हो लेकिन वहां खेलना भी इनके लिए सपने से कम नहीं था। छठवीं क्लास में पढ़ रही शीतल का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह कभी खेलेंगी। उनको यह मुकाम उनकी कड़ी मेहनत के कारण हासिल हुआ है। अब उनका लक्ष्य अगले साल नेशनल खिताब जीतना है।


फुटपाथ पर बनाया अपना आशियाना
इन चार खिलाड़ियों में से जहां एक तरफ शीतल फुटपाथ पर रहती हैं वहीं दूसरी तरफ बाकी तीन खिलाड़ी दिव्या, सिमरन और माला इसी फुटपाथ से 50 मीटर की दूरी पर बनी झुग्गियों में रहती हैं। यह पिछले सात-आठ सालों से यहीं रह रहीं हैं।

ऐसे मिला सपनों को मुकाम
फुटपाथ और झुग्गियों में रहने वाली इन खिलाड़ियों के लिए ये राह आसान नहीं थी लेकिन इन मुश्किलों से ज्यादा इनके हौसलों ने ताकत दिखाई। बचपन से ही ये खिलाड़ी अपने भाई-बहनों के साथ खेला करती थीं। एक दिन वहां से गुज़र रहे लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ आमिर अहमद की नज़र इनके हुनर पर पड़ी। आमिर संस्था काउंसिल फार सोशल एकाउंटिबिलिटी नाम की संस्था भी चलाते हैं जो कि गरीब बच्चों के उत्थान के लिए काम करती है।


इन चारों के हुनर को देखते हुए आमिर ने इनके मां-बाप से बात की और उन्हें स्कूल भेजने के लिए मनाया। आमिर के कहने पर चारों बच्चियों को शासकीय सरोजिनी नायडू स्कूल में भेजा जाने लगा और इसके साथ ही इन्हें खेलने के लिए भी प्रेरित किया जाने लगा। यह आमिर की ही कोशिशों का नतीजा है कि आज इन चारो बच्चियों को इस लेवल तक आने का मौका मिला।

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