कॉमेडियन कपिल शर्मा की दोस्त ने बताया वो राज, जो अब तक छिपा था..

Bhopal, Madhya Pradesh, India
 कॉमेडियन कपिल शर्मा की दोस्त ने बताया वो राज, जो अब तक छिपा था..

मल्टीटैलेंटेड सुगंधा मिश्रा और द वॉइस इंडिया-2 के पार्टीसिपेंट नियम कानूनगो ने शेयर किए अनुभव 

भोपाल। 'आजकल फिल्मों में आलिया, अनुष्का सारी हीरोइन्स तो खुद ही गा रही हैं, ऐसे में मुझे तो प्लेबैक के लिए ऑफर मिलने से रहा। सोच रही हूं कि खुद ही अपनी एक फिल्म बनाऊं और उसमें सिंगिंग करूं।' यह बात कही द वॉइस इंडिया सीजन-2 को होस्ट कर रही मल्टीटैलेंटेड सुगंधा मिश्रा ने। सुगंधा शो के प्रमोशन के लिए बुधवार को भोपाल पहुंची। उनके साथ एमपी से सेलेक्ट नियम कानूनगो भी थे। जो देशभर से चुने गए 49 वॉयस में से एक हैं। सुगंधा ने इस दौरान पत्रिका ऑफिस पहुंचकर अनुभव साझा किए। 



रिएलिटी शो में मैं तीसरी बार पार्टिसिपेट कर रहा हूं। कई लोगों को लगता है कि यह फेयर नहीं होता। लेकिन, सलेक्शन बिल्कुल फेयर होते हैं। एमपी से मेरे अलावा मंसौर से दिव्यांश भी सीजन-2 के लिए सलेक्ट हुए हैं। मैं लास्ट टाइट एलिमिनेट हो गया था। इसलिए इस बार मैंने ज्यादा मेहनत की है, ज्यादा रियाज किया है। इंदौर में ही क्लासिकल की ट्रेनिंग ले रहा हूं। मैंने शुरुआती तालीम पिताजी से ली है। 


sugandha mishra


दादाजी से एक साल तक झूठ बोलती रही

मेरी फैमिली में सभी म्यूजिक बैकग्राउंड से हैं। मैं अपनी फैमिली की चौथी जनरेशन हूं। जब मैंने अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की तो घरवालों को लगा मैं प्रोफेसर बन जाऊंगी किसी कॉलेज में। पर मेरे सपने बहुत बड़े थे। मुझे वह 9 से 5 की जॉब नहीं करनी थी। तब जलंधर में नए-नए एफएम स्टेशन खुले थे। मैं वहां रेडियो जॉकी बन गई। सुबह 6 से 11 मेरा रियाज का वक्त होता था। लेकिन, मैं चुपचाप दादाजी से झूठ बोलकर चली जाती थी। ऐसा 1 साल तक चला और फिर मुझे कॉमेडी शो के लिए कॉल आया और मैं मुंबई आ गई। मुझे अपने दादा जी के सिखाए म्यूजिक को आगे बढ़ाना है, म्यूजिक इंस्टीट्यूट खोलना है।


लता दीदी से थप्पड़ खाने का भी मजा है

मैं एक बार कॉलेज के ग्रुप के साथ भोपाल आई थी। भोपाल मुझे अपने ही होमटाउन जैसा लगता है। मैंने कॉमेडी बस मजाक-मजाक में शुरू कर दी। लेकिन, बाद में खुद को एक्सप्लोर करते-करते जाना कि मैं म्यूजिक के साथ कॉमेडी भी कर सकती हूं। मुझे कॉमेडी की न स्क्रिप्ट लिखनी आती थी, न जोक्स क्रैक करना। इसलिए मैंने म्यूजिक को ही अपनी स्ट्रेंथ बनाया। म्यूजिकल पैरेडी लिखना शुरू कीं और यह मेरी अलग पहचान बन गई। मैं उस लकी डे का इंतजार कर रही हूं, जब लताजी से मैं मिलूंगी। मुझे मालूम है वे मुझे अप्रिशिएट ही करेंगी। अगर थप्पड़ भी मारेंगी, तो मुझे तो उसमें भी मजा आएगा।

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