इस डर से नहीं उठती थी किसी की बेटी की डोली, अब गूंजने लगी शहनाई

Bhopal, Madhya Pradesh, India
इस डर से नहीं उठती थी किसी की बेटी की डोली, अब गूंजने लगी शहनाई

एक अपशगुन के कारण 10 सालों से इस गांव की किसी बेटी की डोली नहीं उठी थी। एक परिवार ने हिम्मत करके यह अंधविश्वास तोड़ दिया और गांव की दहलीज से यह पहली डोली विदा हुई।


भोपाल। एक अपशगुन के कारण 10 सालों से इस गांव की किसी बेटी की डोली नहीं उठी थी। एक परिवार ने हिम्मत करके यह अंधविश्वास तोड़ दिया और गांव की दहलीज से यह पहली डोली विदा हुई।

यह गांव है अशोकनगर जिले का इकोदिया। यहां 10 साल पहले ट्रैक्टर के नीचे दबने से एक गाय की मौत हो गई थी। जैसा की लोगों की आस्था गाय के प्रति होती है, तो लोग इसे अपशगुन मान बैठे। धीरे-धीरे इस पूरे गांव में शुभ कार्य करने से लोग डरने लगे। 

इस परिवार ने की हिम्मत
गांव का दांगी परिवार से यह देख रहा नहीं गया। उसने आस्था और अंधविश्वास के भंवर में सभी धर्म स्थलों में प्रार्थना की और यह हिम्मत जुटाई। उनका कहना है कि बेटियां तो भगवान की ही देन होती हैं। दांगी परिवार ने गुरुवार को अपनी बेटी का मंडल सजाया और भांवरे करवाई। यह नजारा देख कई लोगों की पलकें भीग गई थीं। इस परिवार की पहल के बाद अब दूसरा विवाह भी इसी माह की अंतिम तारीख को होने जा रहा है। इस दिन एक और बेटी की बारात गांव में प्रवेश करेगी।


इसके पहले गांव के बाहर जाकर होती थी शादी
1. गाय की मौत के बाद लोग अपशगुन के फेर में दूसरे गांव जाकर शादी करते थे। दांगी परिवार की पहल के बाद अन्य लोगों को भी हिम्मत आ गई।

2. वेलेंटाइन डे के मौके पर विदिशा जिले के मैनखेड़ी से यहां बारात आई थी। दूल्हा वीरेंद्र मोहन सिंह दांगी के घर बारात लेकर पहुंचा था। दांगी की बेटी रूबी को लेकर अब वह विदा हो गया।

3. 12 वर्ष पहले से जमे इस अंध विश्वास से लोगों का पिंड छूट गया। रूबी के परिवार के लोगों ने बताया कि कुरीतियों को न मानते हुए घर से ही बेटी को विदा करना उचित समझा। उनका मानना है कि इस दुनिया में जो होना है वो होकर रहेगा। बाकी ईश्वर पर हमें भरोसा है।


खत्म हो गया गांव का यह अंधविश्वास
- यह प्रतिबंध किसी ने गांव में नहीं लगाया था, लेकिन गांव वाले एक दूसरे को देखकर ही अंधविश्वास मानने लगे थे। अब हमने हिम्मत की तो अन्य लोगों में भी गांव के लोगों को शुभ कार्य करने की हिम्मत आ गई।

-इस कुप्रथा के कारण बेटियों के विवाह में ज्यादा परेशानी गरीब परिवारों को उठाना पड़ रही थी। वे दूसरे गांव जाकर विवाह कर रहे थे।
- उन्हें गांव से दूर मुंगालिया, अशोकनगर और अन्य जिलों में शादी करना पड़ रही थी। इस काम में उन्हें अतिरिक्त पैसा भी खर्च करना पड़ रहा था।

इन गांव में बाकी है अंधविश्वास
एक गांव में हुए इस अंधविश्वास के खात्मे के बाद अब ओंडेर, जारोली, धुवयाई आदि गांव रह गए हैं जहां यह कुप्रथा खत्म होना है। इस गांव के लोग भी दूसरे गांव में जाकर अपनी बेटी की शादी करते हैं।


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