MP में भी बनेंगी हाईराइज बिल्डिंग्स, जल्द साफ होगा रास्ता

Bhopal, Madhya Pradesh, India
MP में भी बनेंगी हाईराइज बिल्डिंग्स, जल्द साफ होगा रास्ता

कुछ शहरों में जल्द ही हाइराइज बिल्डिंग्स की परमिशन का रास्ता साफ होने वाला है। जिसके बाद सिलेक्ट किए गए शहरों में भी हाइराइज बिल्डिंग्स का निर्माण किया जा सकेगा


भोपाल। मध्य प्रदेश के स्मार्ट शहरों में अब विकास फैलेगा ही नहीं, बल्कि आकाश की ऊंचाईंयों की ओर बढ़ेगा। दरअसल मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में जल्द ही हाइराइज बिल्डिंग्स की परमिशन का रास्ता साफ होने वाला है। जिसके बाद सिलेक्ट किए गए शहरों में भी हाइराइज बिल्डिंग्स का निर्माण किया जा सकेगा। नगरीय प्रशासन संचालनालय ने प्रदेश में बहुमंजिला निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक नया प्लान बनाया है।

नए प्लान के मुताबिक स्मार्ट सिटीज् को चौड़ी सड़कों और हाईराइज बिल्डिंग्स से तैयार किया जाएगा। ताकि सड़कों पर लोड कम हो, साथ ही छोटी इमारतों के स्थान पर बहुमंजिला इमारतें तैयार कर फैलते हुए शहर को समेटा जा सके। माना जा रहा है कि इस प्लान के बाद लगातार फैल रहे क्षेत्रफल के कारण बर्बाद हो रही बेशकीमती खेती योग्य जमीन बचाई जा सकेगी। 


शहर के वर्टिकल विकास को प्रस्तावित करते हुए नए कॉरिडोर प्लान में शामिल हैं। इस प्लान के अन्तर्गत ऊंची इमारतों के लिए विदेशों की तर्ज पर बिल्ड अप एरिया बढ़ाया जाएगा। साथ ही तेजी से आवागमन के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बेहतर विकल्पों को भी डेवलप किया जाएगा। 


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ये है टीओडी का मतलब 
टीओडी यानि ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, इस प्लान में शहर का होरिजोनट्ल (क्षैतिज) विस्तार न कर, वर्टिकल(ऊर्ध्वाधर) विस्तार प्रस्तावित किया जाता है। चौड़ी सड़कें इस प्लान का हिस्सा होती हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य बिना रुका हुआ ट्रांसपोर्ट होता है। इसके अलावा सिलेक्टेड क्षेत्रफल के आसपास ऊंची इमारतें बनाकर आबादी का घनत्व अधिक रखा जाता है। 

ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के जरिए लोगों को अपने ऑफिस के पास ही घर आराम से मिल जाता है, जिससे उन्हें अपने कार्यालय तक की लम्बी दूरी तय नहीं करनी पड़ती है। इसके साथ ही घर से 500 मीटर की दूरी के बीच ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुहैया कराने का भी प्रस्ताव होता है। रोड चौड़ी होने से लोगों को ट्रैफिक जाम में फंसने ने निजात मिलती है।




क्या है एफएआर, ऐसे समझें
एफएआर का मतलब होता है, फ्लोर रेशिओ एरिया। इसका मतलब होता है कि जिस जमीन पर बिल्डिंग बन रही है, उसके क्षेत्रफल के हिसाब से उसकी ऊंचाई निर्धारित की जाती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैमन इंडिया के सीबीडी प्रोजेक्ट को 2.5 एफएआर की परमिशन मिली थी, ये प्रोजेक्ट 22 मंजिला ऊंचा है। 3 एफएआर मिलने के बाद आप अपने प्लॉट एरिया के अधिकतम तीन गुना तक निर्माण कर सकेंगे।

कैबिनेट से मंजूरी के बाद साफ होगा रास्ता
स्मार्ट सिटीज् के लिए तैयार हो चुके इस प्लान को जल्द ही कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। यहां से मंजूरी मिलते ही शहरों के मास्टर प्लान में संशोधन कर कुछ क्षेत्रों को टीओडी के लिए खोला जाएगा। इसके जरिए स्मार्ट सिटीज् में चयनित साइट्स के लिए टीओडी के प्रावधान लागू माने जाएंगे। इस बारे में संचालनालय ने टीओडी के हिसाब से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

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