9 दिन से रोज मत्था टेकने जाता था गुरूद्वारे, 10वे दिन मिली मौत

Bhalender Malhotra

Publish: Jun, 20 2017 12:49:00 (IST)

bhopal
9 दिन से रोज मत्था टेकने जाता था गुरूद्वारे, 10वे दिन मिली मौत

मुंहबोली मां और बहन के साथ मत्था टेकने गुरूद्वारे जा रहे युवक की सड़क हादसे में मौत, बहन घायल, अस्पताल में भर्ती

भोपाल. अमृतविला के योग में हर रोज गुरूद्वारे मत्था टेकने जा रहे एक युवक की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। युवक अपनी मुंहबोली मां और बहन के साथ पिछले 9 दिन से गुरूद्वारे में मत्था टेकने जाता था और वहां दो घंटे रूककर गुरूद्वारे में सेवा करता था। हादसे में मुंहबोली बहन घायल हो गई, चूंकि वह युवक की बाइक पर बैठी थी। यह घटना रविवार तड़के टीटी नगर थाना क्षेत्र की है।

टीटी नगर थाना पुलिस के मुताबिक 23 वर्षीय अंकित उर्फ जितेश रावलानी सुभाष स्कूल के पास रहता था। वह अपने पिता के साथ व्यवसाय करता था। रविवार सुबह 4 बजे वह अपनी मुंहबोली मां शीला लालवानी और बहन ज्योति लालवानी दोस्त प्रेम के साथ ईदगाह हिल्स गुरूद्वारे जा रहा था।

एक बाइक पर मां शीला और दोस्त प्रेम सवार थे। जबकि दूसरी बाइक अंकित चला रहा था, उसके पीछे मुंहबोली बहन ज्योति बैठी थी। जब वह मानव संगहालय के समीप एमपीईबी दफ्तर के पास पहुंचे, तभी रॉंन्ग साईड में आ रहे एक बाइक सवार ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में अंकित की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके पीछे बाइक पर बैठी मुंहबोली बहन ज्योति लालवानी गंभीर रूप से घायल हो गई। ज्योति को उपचार के लिए नर्मदा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। बाइक चालक के खिलाफ तेजी वह लापरवाही से बाइक चलाने का प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

घर का इकलौता बेटा था, बताकर नहीं निकला

बताया गया है कि अंकित उर्फ जितेश अपने पिता का इकलौता बेटा था। वह पिछले 9 दिन से हर रोज ईदगाह हिल्स गुरूद्वारे में मत्था टेकने जा रहा था। रविवार को वह घर पर बताकर नहीं निकला था। परिजनों को तब पता चला, जब पुलिस ने उसकी मौत की सूचना दी। इधर मुंहबोली मां शीला लालवानी ने बताया कि वह अंकित को अपने बेटे की तरह मानती थी। पिछले साल नवम्बर माह में मुंबई स्थित उल्लास नगर गुरूद्वारे में अंकित से उनकी मुलाकात हुई थी। तब से उसका घर आना-जाना था। इस समय अमृतविला का समय है, अमृतविला होने के चलते वह 40 दिन तक गुरूद्वारे जाते तो वाहेगुरू उनकी मनोकामना पूर्ण करते।

 वह चारों 9 दिन से लगातार गुरूद्वारे जा रहे थे। सुबह 4 बजे निकलते और दो घंटे गुरूद्वारे में सेवा कर 6 बजे वापस घर लौटते थे। शीला लालवानी ने बताया कि एक्सीडेंट होने के बाद वह फोन पर 108 बुलाते रहे, पुलिस को फोन करते रहे। लेकिन मदद नहीं मिली। करीब आधे घंटे बाद 108 मौके पर पहुंची, वह अंकित और अपनी बेटी को लेकर नर्मदा हॉस्पिटल पहुंचे, जहां अंकित को मृत घोषित कर दिया।

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